दोहरीघाट। लगातार दो दिन घाघरा का जलस्तर स्थिर रहने के बाद तीसरे दिन गुरुवार को घाघरा में एकाएक उफान आने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों के माथे पर एक बार फिर चिंता की लकीर दिखायी दे रही है। नदी के उग्र होने की के आसार से लोगों की नींद उड़ गई है। इससे ऐतिहासिक धरोहरों तथा तटवर्ती इलाकों का अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
लगातार दो दिन से नदी स्थिर रहने के बाद गुरुवार को नदी में एक बार फिर उफान आने से तटवर्ती इलाकों में बेचैनी बढ़ गई है। 24 घंटे में चार सेमी नदी के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो मंगलवार को जलस्तर गुरुवार को 69.48 मीटर रहा।जबकि बुधवार को जलस्तर 69.44 मीटर था। जबकि गौरीशंकर घाट पर खतरे का निशान 69.90 मीटर आंका गया है। घाघरा द्वारा मुक्तिधाम के पास कहर बरपाने के बावजूद प्रशासन मामले को हल्के में ले रहा है। नदी के स्थिर हो जाने के बाद लोग राहत महसूस कर रहे थे। लेकिन नदी में फिर उफान आने के बाद नदी उग्र हो गई है। नदी के उग्र होने से नगर की ऐतिहासिक धरोहरें मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला और मुक्तिधाम पर संकट के बादल मंडराने लगा है। वहीं तटवर्ती इलाकों धनौली रामपुर, नई बाजार, नौली, चिऊंटीडांड़, लामी, तारनपुर, कादीपुर, हरधौली, बहादुरपुर, बुढावर, पतनई, सरयां, ठिकरहिया, नगरीपार, रसूलपुर, सूरजपुर सहित दर्जनों गांवों के लोग दहशत में जी रहे हैं। घाघरा की लहरें मुक्तिधाम पर टक्कर मार रही है।