मऊ। आजादी का अमृत महोत्सव के तहत अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर सोमवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुवंर मित्रेश सिंह कुशवाहा की अध्यक्षता मे गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें कन्या भ्रूण हत्या को रोके जाने के बावत लोगों को जागरूक किया गया।
इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुवंर मित्रेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि भ्रूणहत्या अपराध है। ऐसे में लिंग परीक्षण न कराएं। कहा कि लिंग अनुपात कम होने से समाज में अराजकता पैदा हो जाएगी। कहा कि भारतीय समाज में नारी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। नारियां किसी भी क्षेत्र मे पुरुषों से पीछे नहीं है। सेना हो, न्यायिक क्षेत्र अथवा प्रशासनिक सेवा हर जगह नारियां अपने दायित्वों का निर्वहन बखूबी कर रही है।
ऐसे मे बेटी और बेटा मे कोई फर्क नहीं है। बस इस संबंध मे हमे अपनी नजरिया बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बेटी पर अभिमान और उनके जन्म का सम्मान करने के उद्देश्य से कर्मचारियों को इक्कसवी सदी कीं अग्रणी बेटियों तथा महिलाओं के पोस्टर सेंटर पर लगाकर उनके संबंध में जानकारी प्रदान कर अल्ट्रासाउन्ड केंदों पर गर्भपात नियंत्रण के लिए लोगों मे जागरूकता जरूरी है। इसी क्रम में वन स्टाफ सेंटर में विधिक जागरुकता शिविर आयोजित कर हिंसा पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता प्रदान किए जाने व उनके, मेडिकल एवं अस्थायी रुप से रहने, मूलभूत सुविधाओं और हेल्पलाइन सेंटर आदि के संबंध में जानकारी दी गई।
विधि पर्यवेक्षा अधिकारी ने पीड़ित महिलाओं को वन स्टाफ सेंटर द्वारा उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकरी प्रदान की। इस दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी समर बहादुर ने पीसीपीएनडीटी अधिनियम-1994 के बाबत जानकारी दी। इस दौरान काफी संख्या मे लोग उपस्थित रहे।