निकायों द्वारा वार्डों में कराए गए विकास कार्यों का दावा कागजी है, जबकि हकीकत इससे कोसों दूर है। इसका ज्वलंत उदाहरण दोहरीघाट नगर पंचायत में देखने को मिला है। जहां बीते साल नवंबर में एक खुले नाले में गिरकर एक मासूम की मौत के बाद भी अब तक उस नाले को ढंकने का कार्य नहीं हो पाया है। जबकि स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि इस घटना के बाद नगर पंचायत के जिम्मेदारों को चेतना आएगी और खुले नालों पर पटिया बिछाने का कार्य शुरू होगा। लेकिन हादसे के बाद भी नाला खुला हुआ है।
बताते चलें कि नगर पंचायत दोहरीघाट द्वारा वार्डों में पानी की निकासी को लेकर नाले-नालियों का निर्माण तो कराया गया है, लेकिन इन नालों को बनाने के बाद निकाय के जिम्मेदार इसे सुरक्षित करने के उद्देश्य से पटिया बिछाने का कार्य भूल गए। नवंबर 2021 में नगर के रेलवे स्टेशन के सम्मिलत मुहल्ला निवासी कन्हैया का डेढ़ वर्षीय मासूम पुत्र घर के बाहर बने पांच फीट तथा तीन फीट चौड़े नाले में गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इस नाले को पांच वर्ष पूर्व निकाय द्वारा बनाया गया था, लेकिन इस अवधि में नाले को ढकने का कार्य नहीं हुआ। जबकि स्थानीय लोग श्रीराम सोनकर, नंदलाल मद्देशिया, मनोज जायसवाल, विनोद आदि का कहना है कि कई बार इस नाले को ढंकने के लिए शिकायत की गई थी। नवंबर में मासूम की गिरकर मौत के बाद आक्रोशित लोगों ने निकाय पर लापरवाही का आरोप लगाया। और पुलिस बूथ के सामने दोहरीघाट-मऊ सड़क पर जाम लगा दिया था। बावजूद घटना के कई माह बीतने के बाद भी इस नाले को अब तक ढंका नहीं जा सका है। ऐसे में लोग सवाल करने लगे हैं कि निकाय को और हादसे का इंतजार है क्या।