मऊ। नवंबर माह में एक पखवाड़ा बीत चुका है, इस माह के खात्मे में महज दस दिन शेष है। ठंड ने दस्तक दे दी है, सुबह और शाम इसका अहसास जिलेवासियों को होने लगा है। तापमान अधिकतम 31 डिग्री तो न्यूनतम 18 डिग्री है। लेकिन इस ठंड का अहसास नगर निकायों के जिम्मेदारों को नहीं है, इसलिए आधा माह बीतने के बाद भी जरूरतमंदों के लिए खोले जाने वाले रैनबसेरों को लेकर अब तक कोई कवायद नहीं हुई है। जबकि त्योहारों का समय होने के चलते इस जिले में लोगों के आने जाने का क्रम ज्यादा हो गया है। इसमें महानगरों से आने वाले कई जरूरतमंद लोग भी हैं, जो कि ट्रेनों से देर रात उतरने के बाद रैनबसेरा न होने से खुले में रात गुजारने को मजबूर हो रहे हैं।
बताते चले कि नगर पालिका द्वारा हर वर्ष ठंड में नवम्बर माह के पहले सप्ताह तक नगर के तीन जगहों पर रैन बसेरा की शुरूआत किया जाता है। इसमें एक रोडवेज डिपो में तो दूसरा आजमगढ़ मोड़ के पास एसबीआई बैंक के सामने खाली जगह पर टेंट लगाकर बनाया जाता है। वहीं तीसरा रैन बसेरा जिला अस्पताल परिसर के इमरजेंसी के पास एक बड़े भवन कक्ष में संचालित किया जाता है। यहां करीब 70 जरूरतमंदों को आश्रय मिलता है। नगर पालिका द्वारा इसको लेकर बकायदा हर रैन बसेरा के लिए दो दो नगर पालिका कर्मचारियों की तैनाती की जाती है, साथ ही ठंड से बचाव को लेकर रैन बसेरा के बाहर अलाव की व्यवस्था भी की जाती है। लेकिन इस साल नवंबर माह का आधा माह बीतने के बाद भी अब तक इसको लेकर नगर पालिका द्वारा कोई कवायद तक शुरू नहीं की गई है। जबकि ठंड शुरू हो गई है, जिससे गरीबों व बाहर से आने वाले लोगों को रात होने पर ठहरने के लिए कोई स्थान नहीं है। ऐसे में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी उन जरूरतमंदों को हो रही है जो कि बाहर से आ रहे हैं और उन्हें अपने गंतव्य स्थान को जाने के लिए रात्रि के समय में वाहन नहीं मिलते हैं, उन्हें ठहरने के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके बाद भी जनपद मुख्यालय पर स्थापित रैन बसेरा सक्रिय नहीं हो सके हैं। जिससे लोगों की समस्या बढ़ गई है।