मऊ। जिला अस्पताल अक्सर अपनी मनमानी के लिए चर्चा में बना रहता है। अस्पताल संसाधनों और चिकित्सकों की कमी के बीच जैसे-तैसे संचालित हो रहा है। चिकित्सकों की लापरवाही की भी शिकायतें आए दिन आती रहती हैं। इसके बाद भी उनकी कार्यप्रणाली में कोई बदलाव आता नहीं दिख रहा है। वहीं विभागीय अधिकारियों के चहेते चिकित्सकों का रवैया भी मनमौजी दिखाई देता है। इन दिनों जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक छुट्टी पर चल रहे हैं। उन्होंने अपना प्रभार दंत रोग विशेषज्ञ चिकित्सक को दिया है।
जिला अस्पताल में हर रोज 1100 से अधिक की ओपीडी है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के उदासीन रवैए से मरीजों का इलाज जैैसे तैसे हो रहा है। जिला अस्पताल में 26 चिकित्सकों का पद सृजित किया गया है। लेकिन वर्तमान में 16 चिकित्सकों की ही तैनाती है। तैनात चिकित्सकों तथा अधिकारियों की मनमानी से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की माने तो नियमत: मुख्य चिकित्सा अधीक्षक अपनी गैर मौजूदगी में अपना चार्ज वरिष्ठ चिकित्सक को ही दे सकते हैं। लेकिन जिला अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सक के होने के बाद भी जूनियर डाक्टर को चार्ज दिया गया है।
वहीं दूसरी तरफ जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के कारण ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उसी बीच चिकित्सकों और कर्मचारियों का छुट्टी पर जाने से मरीजों के बेहतर उपचार की बात बेमानी लगती है। अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल आफिसर का पद काफी समय से खाली चल रहा है। ऐसे में जिला अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों को ही इमरजेंसी में भी ड्यूटी करनी पड़ती है।
इस मामले में जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बृज कुमार बताते हैं कि सीएमएस अवकाश पर जाते समय वरिष्ठता के क्रम में चिकित्सक को कार्यभार सौंप सकते हैं। डेंटल सर्जन काडर में नहीं आते हैं। सीनियर डाक्टर छुट्टी पर हैं। वैसे हम किसी भी डाक्टर को चार्ज दे सकते हैं। दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. सीपी आर्या को जिम्मेदारी दी गई है।
इस मामले में सीएमओ डॉ एसएन दूबे ने कहा कि नियम के अनुसार मुख्य चिकित्सा अधीक्षक वरिष्ठता के क्रम में चिकित्सक को चार्ज देकर छुट्टी पर जा सकते हैं। डेंटल सर्जन श्रेणी में नहीं आते हैं। मामला संज्ञान में नहीं आया है। नियम की अवहेलना मिलने पर सीएमएस को चेतावनी पत्र जारी किया जाएगा।