नगर के मड़इया घाट पर वेदी बनाते बच्चे। अमर उजाला
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नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय डाला छठ पर्व रविवार को शुरू हो गया। व्रती महिलाओं ने अंत:करण की शुद्धि के लिए नदियों, पवित्र पोखरों में स्नान किया। संयमित भोजन के रूप में चावल, चने की दाल और लौकी की सब्जी के रूप में प्रसाद ग्रहण किया। नदी, तालाबों, पोखरों के घाटों पर वेदियां बनाकर लोग अपना नाम, व्रती महिलाओं का नाम लिखकर अपनी जगह सुरक्षित करते देखे गए। पूजा के सामानों की बिक्री तेज होने से बाजारों में सुबह से देर शाम तक गहमागहमी रही।
पौराणिक कथाओं के अनुसार 14 वर्ष वनवास के बाद जब भगवान राम अयोध्या लौटे थे तो रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूय यज्ञ करने का फैसला लिया। इसके लिए मुग्दल ऋषि को आमंत्रण दिया गया था, लेकिन मुग्दल ऋषि ने भगवान राम एवं सीता को अपने ही आश्रम में आने का आदेश दिया। ऋषि की आज्ञा पर भगवान राम एवं सीता स्वयं यहां आए और उन्हें इसकी पूजा के बारे में बताया गया। मुग्दल ऋषि ने कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने का आदेश दिया। यहीं रह कर माता सीता ने छह दिनों तक सूर्यदेव भगवान की पूजा की थी।
इसी मान्यता के तहत नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में व्रती महिलाओं ने रविवार को नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय डाला छठ महापर्व की शुरुआत किया। व्रती महिलाओं ने घर की साफ सफाई कर नदियों, पवित्र पोखरों में स्नान किया। संयमित होकर भोजन चावल, चने की दाल और लौकी (कद्दू) की सब्जी के रूप में प्रसाद ग्रहण किया। सोमवार को खरना रस्म निभाई जाएगी। मंगलवार को छठ पर्व के अवसर पर नगर क्षेत्र के तमसा तट पर स्थित हनुमान घाट, मड़इयाघाट, बमघाट, सत्तीघाट, ढेकुलियाघाट, ब्रह्मस्थान, शीतला माता धाम पर भारी संख्या में व्रती महिलाएं भगवान सूर्य को अर्घ्य देंगी। लोग नदियों, पोखरों पर वेदी बनाने में लग गए हैं। पूजा के सामानों की खरीद बिक्री का दौर तेज हो गया है। छठ के गीत से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है।