मऊ। रोडवेज की बसों को गांवों की सीमाओं तक पहुंचाने के लिए शुरू की गई लोहिया वाहिनी बसों का संचालन नहीं हो पा रहा है। परिवहन निगम ग्रामीण रूटों पर संचालित किए जाने वाली बसों को घाटा तथा खराब सड़क बताकर बंद कर दिया है। रोडवेज बसों का संचालन न होने से लोगों को जान जोखिम में डालकर डग्गामार वाहनों से यात्रा करना पड़ रहा है। जबकि मऊ डिपो प्रबंधन चालकों और परिचालकों की कमी का रोना रो रहा है।
मऊ डिपो से संचालित 53 बसों में 30 से 32 बसों का ही संचालन हो रहा है। डिपो से गाजीपुर छोड़कर वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर, बलिया, गोरखपुर, आजमगढ़, लखनऊ सहित विभिन्न रूटों पर संचालन हो रहा है। जिले में लोहिया वाहिनी की 12 बसें हैं। जिनका संचालन ग्रामीण रूटों के बजाय लंबी रूटों के लिए किया जा रहा है। चालकों की कमी बसों के संचालन में रोड़ा बन रहा है। 108 चालकों के मुकाबले महज 74 चालक हैं। जबकि 108 के मुकाबले 84 परिचालक हैं। चालकों तथा परिचालकों की कमी के कारण बसों का संचालन प्रभावित है। वहीं नगर के ताजोपुर स्थित रोडवेज के वर्कशाप में कई बसें मरम्मत के अभाव में खड़ी हैं। मऊ डिपो से चिरैयाकोट के लिए रोडवेज का संचालन न होने से लोगों को आवागमन के लिए डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं खुरहट रानीपुर-चिरैयाकोट रूट, रतनपुरा-भीमपुरा रूट सहित कई रूटों पर बसों का संचालन न होने से आम नागरिक और किसानों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
चालकों की कमी के बीच जैसे-तैसे बसों का संचालन विभिन्न रूटों पर सुनिश्चित किया जा रहा है। छह बसें ग्रामीण रुटों पर चल रही हैं। खराब सड़कों तथा घाटा के चलते कई ग्रामीण रूटों की रोडवेज बसें बंद कर दी गई है। - रमेश चंद्र, एआरएम, मऊ