मऊ। लोगों को अच्छी चिकित्सकीय सुविधा देने के दावों के विपरीत व्यवस्थाएं दुरूस्त होती नहीं दिख रही है। झुलसे मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में छह वर्ष पूर्व बनकर तैयार हुआ बर्न यूनिट अब तक शुरू नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि कोविड काल में टीकाकरण प्रारंभ होते ही इस यूनिट को कोविड टीकाकरण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। जबकि स्वास्थ्य विभाग बर्न यूनिट को शुरू करने के लिए चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी का रोना रो रहा है।
जिला अस्पताल में वर्ष 2016 में तीन करोड़ की लागत से बर्न यूनिट का निर्माण कराया गया था। लेकिन पिछले छह वर्षों से विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्टॉफ की तैनाती न होने के कारण इस यूनिट का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। गर्मियों के मौसम ने दस्तक दे दी है, लेकिन अभी तक इस यूनिट को प्रारंभ किये जाने की दिशा में कोई कार्य होता नहीं दिख रहा है। हालांकि इस यूनिट को शुरू करने के लिए चार विशेषज्ञ चिकित्सक और 10 स्टॉफ नर्स की तैनाती होनी है। इतना ही नहीं कोविड काल में टीकाकरण प्रारंभ होने पर इस यूनिट के भवन का इस्तेमाल कोविड टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। जबकि जिला अस्पताल में काफी पहले से बना 25 बेड का एक अन्य भवन खाली पड़ा है। अस्पताल प्रशासन की माने तो इस यूनिट में चिकित्सकों की तैनाती के लिए कई बार प्रस्ताव भी भेजे गए लेकिन इस दिशा में कोई ठोक कदम उठता नहीं दिखाई दे रहा है। हालांकि जिला अस्पताल में दो कमरों का वर्न वार्ड जरूर है, जहां झुलसे मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जाता है।
गर्मियों में आगजनी की घटनाओं में होता है इजाफा
मऊ। इस वर्ष मार्च माह में ही गर्मी ने अपना तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। अप्रैल माह शुरू होते ही आगजनी की घटनाओं में अचानक से इजाफा हो जाता है। गेंहू के खेतों आग लगने, शार्ट सर्किट से घरों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती है। जिला अस्पताल में फिलहाल मामूली रूप से जले हुए लोगों को भी अलग से कहीं रखने का इंतजाम नहीं है। लेकिन सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार पल्ला झाड़ते दिखाई देते है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बृज कुमान ने बताया कि प्लास्टिक सर्जन और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की मांग को लेकर शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। बार-बार रिमाइंडर भी भेजा जाता है। चिकित्सक के मिलने पर बर्न यूनिट को तत्काल प्रारंभ कर दिया जाएगा।