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पत्नी को बनाना चाहता था ब्लाक प्रमुख

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कोपागंज। दुर्दांत अपराधी लालू यादव की नजर कोपागंज ब्लाक प्रमुख की कुर्सी पर थी। इस कुर्सी पर कब्जा करने की नीयत से उसने अपनी पत्नी और मां को बीडीसी का चुनाव लड़ाया था। 18 साल पहले वह निजी बस में खलासी का काम करता था। यहीं से वह अपराधियों की सोहबत में आ गया और अपराध की दुनिया में नाम कमाता चला गया।
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पुलिस को चकमा देने में माहिर लालू आखिरकार पुलिस की नजरों से बच नहीं सका और पुलिस से मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए लालू यादव उर्फ विनोद यादव पर कोपागंज थाने में हत्या लूट, हत्या के प्रयास और गैंगस्टर सहित 12 मुकदमे दर्जं हैं। लालू यादव ने 2015 में हुए डांड़ी ग्राम पंचायत से अपनी पत्नी को प्रधान पद का चुनाव लड़ाया और अपने प्रभाव से उसकी जीत दिलाई। इस बार के चुनाव में उसकी नजर कोपागंज के ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर थी जिसके लिए उसने अपनी पत्नी को निर्विरोध क्षेत्र पंचायत का चुनाव जितवाकर विरोधियों के होश उड़ा दिया था। हिस्ट्रीशीटर लालू यादव का आपराधिक जीवन 18 साल पुराना है। प्राइवेट बस में खलासी का कार्य करते करते उसका संपर्क अपराधियों से हो गया और उसने कोपागंज में पहली वारदात कुर्थीजाफरपुर क्षेत्र में कोपागंज के एक व्यापारी से लूट और हत्या का प्रयास करके किया था। कुछ ही दिनों में कोपागंज थाना में उसके खिलाफ हत्या लूट ,गैंगस्टर के मामले दर्ज हो गए और वह कोपागंज थाने मोस्ट वांटेड अपराधी हो गया। अपनी हनक के बल पर 2015 के पंचायत चुनाव में अपनी पत्नी रीमा यादव को प्रधान पद पर विजय दिला दी। इस बार के चुनाव में उसकी नजर कोपागंज के ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर थी।
वह ब्लॉक प्रमुख पद के सहारे वह राजनीति में प्रवेश करना चाहता था। इसके लिए उसने अपनी पत्नी रीमा यादव को दर्पनारायणपुर से क्षेत्र और अपनी मां सोनिया देवी को डांडी क्षेत्र पंचायत का चुनाव लड़ा रहा था। इसके लिए उसने अपनी पत्नी को दर्पनारायणपुर से निर्विरोध विजयी कराया तो विरोधियों के होश उड़ गया था। लेकिन इससे पहले ही वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया और पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।
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