कोपागंज के लैरोदोनवार गांव में श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन लैरो दोनवार में कथा सुनाते अतुल कृष
कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब इसे हम अपने जीवन में व्यवहार में धारण कर निरंतर हरि स्मरण करते हुए अपने जीवन को आनंदमय और मंगलमय बनाएं तथा आत्मकल्याण करें। भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है।
इससे संशय दूर होता है और शांति एवं मुक्ति मिलती है। इसलिए सद्गुरु की पहचान कर उनका अनुकरण एवं निरंतर हरि स्मरण तथा भागवत कथा श्रवण करने की आवश्यकता है।
उक्त बातें कोपागंज क्षेत्र के ग्राम सभा लैरो दोनवार में चल रही सात दिवसीय भागवत कथा के पहले दिन मंगलवार की शाम अतुल कृष्ण शांडिल्य जी महाराज ने श्रोताओं को कथा का रसपान कराते हुए कही।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से जन्म-जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है।
भागवत पुराण हिंदुओं के अट्ठारह पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद्भागवत या केवल भागवतम् भी कहते हैं। इसका मुख्य विषय भक्ति योग है, जिसमें श्रीकृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है।
इस अवसर पर सुदर्शन सिंह, सुरेश सिंह, पशुपतिनाथ सिंह, रमेश सिंह, उपेंद्र सिंह, बलवंत सिंह, मदनगोपाल सिंह, हृदयनारायण सिंह, विनोद सिंह आदि उपस्थित रहे।