अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव अतुल कुमार सिंह अंजान ने कहा कि आज देश का भाग्यविधाता किसान परेशान है। उनकी माली हालत दिन प्रति दिन खराब होती जा रही है। लोकसभा में अलग से किसान बजट पेश करने की लिये सुप्रीमकोर्ट में पीआईएल दाखिल करूंगा। खेती बचेगी तो किसान बचेगा, किसान बचेगा तो देश बचेगा। वे घोसी में किसान जागरण यात्रा के दौरान आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 के जनगणना के आंकड़े ग्रामीण जीवन की हताशा और गंभीरता को दर्शाता है। केंद्र सरकार की गलत नीतियों के आजादी के बाद किसान शोषित होता रहा। उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोत्तरी और बाजार में कृषि उत्पादों के मूल्य गिरते जाने से उनके अंदर निराशा व्याप्त हो गयी है।
किसानों को इस हताशा से बचाने के लिये कृषि पर सब्सिडी देकर प्रोत्साहित करने की जरूरत है। खेती बचेगी तो किसान बचेगा,किसान बचेगा तो देश बचेगा। खेती-किसानी को बचाने के लिए भाजपा, कांग्रेस, बसपा सभी दलों को मिलजुलकर काम करना होगा। किसान खेती किसानी से दूर होते जा रहे हैं यह चिंता का विषय है। जल्द किसान आयोग का गठन होना चाहिए।
किसान जागरण यात्रा का नेतृत्व कर रहे पूर्व विधायक राजेंद्र यादव ने कहा की केंद्र और प्रदेश की सरकारें फालतू मदों में करोड़ों रुपये बजट दे रही हैं लेकिन किसानों के लिये बहुत कम बजट जारी कर रही हैं। किसानों के लिये बजट का मात्र दो प्रतिशत ही दिया जा रहा है। उन्होंने किसानों, बुनकरों, दस्तकारों को 10 हजार रुपये महीने की पेंंशन देने की मांग की। अर्चना उपाध्याय ने रथयात्रा का स्वागत किया।
मदन लाल श्रीवास्तव, गुफरान,शेख हिसामुद्दीन, रामनारायण सिंह, अनीस अहमद, पीएन सिंह, मनोज आदि ने संबोधित किया।
उधर, मधुबन में शहीद स्मारक पर आयोजित सभा में अंजान ने कहा कि किसान अपनी फसल औने पौने दामों पर बेचकर किसी तरह अपने बच्चों का पेट पालने को मजबूर है। सरकार ने अपनी तिजोरियों का मुंह सरकारी नौकरों और पूंजीपतियों के लिये खोल रखा है ऐसे में 20 मई को लखनऊ कूच करने के लिए किसानों का आहवान किया। राम सेवक यादव,राज बहादुर सिंह,बीएन सिंह ,चंद्रिका यादव आदि उपस्थित थे।