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शासन की योजनाओं को नहीं मिल रही गति

Sat, 16 Apr 2016 12:08 AM IST
ब्यूरो, मऊ
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ऑफिस - फोटो : demo pics
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 गांवों में विकास कार्यक्रमों को गति नहीं मिल रही है। एक ही कर्मचारी न सिर्फ कई योजनाओं का संचालन कर रहे बल्कि कई गांवों की जिम्मेदारी भी देख रहे हैं। इसके चलते न सिर्फ ग्रामीणों का काम हो पा रहा है और न ढंग से विकास कार्यक्रमों पर ध्यान दिया जा रहा है। जिले में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी से लेकर खंड विकास अधिकारी का भी पद रिक्त है।
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जनपद में नौ विकास खंडों में 684 ग्राम पंचायतें हैं। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यक्रमों को संचालित करने के साथ ही मनरेगा सहित अन्य शासन के कार्य की देखरेख के लिए ग्राम पंचायत विकास अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी रखे गए हैँ। इनकी मानीटरिंग खंड विकास अधिकारी करते हैं। जिले के नौ ब्लाकों में देखा जाए तो महज 6 बीडीओ की ही तैनाती है। परदहां, रानीपुर, बड़रांव का कार्य अन्य ब्लाकों में तैनात बीडीओ या एसडीओ को सौंपा गया है।

एक ही बीडीओ पर दो ब्लाकों की जिम्मेदारी होने के चलते वह न अपने ब्लाक और न ही चार्ज लिए गए दूसरे ब्लाक की जिम्मेदारी संभाल पाते हैं। जिन ब्लाकों में ऐसी स्थिति है वहां के ग्राम प्रधान से लेकर क्षेत्र पंचायत सदस्य ही नहीं आम लोगों का काम भी समय से नहीं हो पाता है। वह इस ब्लाक से उस ब्लाक में जाकर बीडीओ के आने का इंतजार करते हैं। इसी प्रकार जिले में ग्राम पंचायतों को देखा जाए तो 684 ग्राम पंचायतों में महज 102 ग्राम पंचायत विकास अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी तैनात हैं।
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एक कर्मचारी के जिम्मे छह गांव से लेकर दस गांव हैं। इसके चलते इनका भी किसी गांव में आना जाना नहीं हो पाता। यह सिर्फ ग्राम प्रधान तक ही उपलब्ध हो जाएं यही बहुत है। ग्रामीणों को किसी कागज पर हस्ताक्षर कराने के लिए इनके आवास से लेकर दूसरे गांवों में खोजना पड़ता है।  जिले में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के कुल 92 पद स्वीकृत हैं। जबकि इसके सापेक्ष तैनाती महज 38 है।
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