मऊ। नगर के बाल निकेतन तिराहा स्थित महिला जिला अस्पताल का दशकों पुराना भवन जर्जर हो चुका है। जर्जर भवन के चलते इसमें संचालित जिला महिला अस्पताल को बगल में ही बने पांच मंजिला नए भवन में मैटरनिटी विंग मेें शिफ्ट कर संचालित किया जा रहा है। उधर स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब जर्जर भवन को तोड़कर इस पर नया भवन बनाने की कवायद शुरू कर चुका है। विभाग ने इसकेे लिए भवन को तोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग को प्रस्ताव बनाकर भेज चुका है, जहां इसका मूल्याकंन करने के बाद भवन को गिराने के बाद नए भवन बनाने के लिए प्रस्ताव बनाया जाएगा।
100 बेड वाला महिला जिला अस्पताल का भवन करीब दो वर्षो से मेटरनिटी विंग के पांच मंजिला भवन में संचालित हो रहा हैै। ऐसे तो मेेटरनिटी विंग में ओपीडी का संचालन नहीं हो सकता, लेकिन महिला अस्पताल का पुराना भवन बेहद जर्जर होने चलते मेटरनिटी विंग के साथ इसमें ओपीडी का भी संचालन हो रहा है।
अमर उजाला द्वारा भी जर्जर भवन में संचालित महिला अस्पताल में अव्यवस्था को लेकर 31 जुलाई 2018 को टपक रहे लेबर रूम में कराया जा रहा प्रसव सहित दूसरे शीर्षकों से कई बार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिस पर दो अगस्त 2018 को तत्कालीन सीडीओ आशुतोष कुमार द्घिवेदी पह़ुंचकर महिला जिला अस्पताल को नवीन भवन में शिफ्ट करने का निर्देश दिया था। जिस पर वर्ष 2019 में नवरात्र पर तत्कालीन सीएमएस डॉ. आरके गुप्ता द्वारा पांच मंजिला भवन के बनने पर अस्पताल को शिफ्ट कर दिया गया था।
उधर बेकार भवन घोषित हो चुके पुराने जिला महिला अस्पताल को ध्वस्त कर उस जमीन पर नया भवन बनाने की कवायद स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू कर दी गई है। विभाग द्वारा इस भवन को गिराने के लिए प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है। इस बाबत सीएमओ डॉ. एसएन दुबे ने बताया कि प्रस्ताव बहुत पहले ही भेजा जा चुका है, जिससे भवन को ढहाने के बाद उस पर नया भवन बनाया जा सके।
एमसीएच विंग में मां-शिशु का होता है इलाज
मऊ। एमसीएच विंग (मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ) में मां और शिशु का उपचार एक ही छत के नीचे किया जाता है। प्रसव से पहले गर्भवती महिला को इस विंग में रखा जाता है। प्रसव के बाद शिशु के इलाज के साथ मां का इलाज इसी विंग में किया जाता है। 100 बेड के इस मैटरनल एंड चाइल्ड विंग से जनपद के गर्भवती महिलाओं और उनके शिशुओं का इलाज आसान हुआ है। इससे डाक्टर सहित मरीज और उनके तीमारदारों को काफी सहूलियत मिलती है।