मऊ। अभी तक आपने गोबर गैस से केवल खाना बनते ही देखा होगा। मगर अब उससे बिजली पैदा भी की जाएगी। इससे टीवी, पंखा और सीएफएल भी चलाए जा सकेंगे। यह कारनामा भूमि संरक्षण विभाग के सेवानिवृत्त निरीक्षक उदयभान सिंह ने गोबर गैस को संयंत्र कर बिजली का उत्पादन कर दिखाया।
ताजोपुर पश्चिमपुरा निवासी उदयभान सिंह ने छह साल पूर्व मकान में बायोगैस संयंत्र करने का प्रोजेक्ट लगवाया था। इससे उनके घर में गैस की किल्लत होनी कम हो गई। लेकिन एक हफ्ते पूर्व मुख्य विकास अधिकारी अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने उनके गैस संयंत्र प्रोजेक्ट का देखा और एक इंजीनियर विरेन्द्र सिंह को उससे बिजली पैदा करने की तरकीब बताई। इसके बाद इंजीनियर विरेन्द्र सिंह ने उस पर कार्य कर शनिवार को बिजली पैदा कर दिखाया। बिजली के लिए जब उन्होंने गोबर गैस प्लांट की गैस को कार्बोरेटर में रिलीज कराई तो एक हार्सपावर का इंजन स्टार्ट हो गया। जब तक गैस रिलिज होती रही इंजन चलता रहा। इससे टीवी, पंखा और छह सीएफएल जलाया गया। इसे देखकर वहां मौजूद लोगों के खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
गैस सेे बिजली बनने पर होगी काफी बचत
उदयभान सिंह ने कहा कि गोबर गैस से अभी तक हमारा दो हजार रुपये बच जाता था। हमें गैस सिलेंडर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती थी। लेकिन अब तो करीब चार हजार रुपये बचेगा। क्योंकि अब तो गैस से बिजली पैदा होने पर जनरेटर नहीं चलाना पड़ेगा और पेट्रोल का पूरा पैसा बचेगा।
उत्तर प्रदेश में यह नया प्रयोग : सीडीओ
गोबर गैस से बिजली पैदा होने के बाद मुख्य विकास अधिकारी अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कम से कम गोबर गैस से बिजली बनाए जाने की यह तकनीक और प्रयोग काफी नया है। इससे गांव में जहां बिजली का संकट भी खत्म होगा। वहीं लोगोें को काफी सुविधा भी होगा। उन्होंने बताया कि गोबर गैस बनाने के लिए शासकीय अनुदान भी मिलता है। लेकिन उसके लिए पात्र के पास दो जानवर होने चाहिए।