मऊ। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत दिवस पर उप्र क्रांतिकारी स्मारक समिति की ओर से नगर के हिंदी भवन में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इसमें अमर शहीदों के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया गया।
मुख्य अतिथि काशी विद्यापीठ वाराणसी के प्रो. रविप्रकाश पांडेय ने कहा कि आधुनिकीकरण की गर्भ से निकली हुई संकल्पना है लोकतंत्र। वह सरकार संचालन का स्वरूप नहीं वसन संपूर्ण जीवन शैली है। सफल संचालन के लिए विवेक की आवश्यकता होती है। इसकी विकृतियों की जिम्मेदारी भी जनता को स्वयं से लेनी होगी। उसे लोकतंत्र के महापर्व पर ईमानदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों को वरण करना होगा। मुख्य वक्ता और किसान सभा बिहार के प्रदेश उपाध्यक्ष स्वामी अगरेनंद चौधरी ने कहा कि आज हिंदुस्तान की आजादी और हिंदुस्तान का लोकतंत्र घूसखोर, सूदखोर, कमीशनखोर लोगों के हाथ में है। देश वर्गों में बंटता जा रहा है। लोकतंत्र के मूल्य समानता, स्वतंत्रता, मातृत्व का व्यवस्था में लोप होता जा रहा है। संविधान सम्मत समानता सिर्फ संविधान की किताब में कैद होकर तड़फड़ा रही है। एक ही कक्षा की पढ़ाई के लिए 20 तरह के स्कूल चल रहे हैं। आवश्यकता एक बार पुन: भगत सिंह के पुनर्जीवन की है। सभा को विशिष्ट अतिथि सुरेश बहादुर सिंह, सुधा राय, डा. ज्ञान प्रकाश दुबे, डा. संतोष सिंह, देव प्रकाश राय, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राष्ट्र कुंवर सिंह, रामाश्रय राय, अरविंद कुमार सिंह, संजय राय, डा. राजित राम यादव, सच्चिदानंद सिंह, अजय शुक्ला, जय सिंह आदि ने संबोधित किया।
भ्रष्टाचार मिटाने के लिए की क्रांतिकारी दल की स्थापना
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मऊ। शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू के शहादत दिवस पर अमर शहीदों के सपनों को साकार करने के लिए तमसा तट पर देश को आतंकवाद, भ्रष्टाचार मिटाने की शपथ लेकर क्रांतिकारी दल की स्थापना की।
तमसा पर राकेश सिंह एडवोकेट के नेतृत्व में क्रांतिकारी विचारों से ओतप्रोत नागरिकों ने इकट्ठा होकर शपथ लिया कि वे भविष्य में कोई ऐसा कार्य नहीं करेंगे जिससे देश की एकता और अखंडता को खतरा हो। क्रांतिकारी नागरिकों ने ईश्वर को साक्षी मानकर शपथ लेेते समय अपने उद्देश्य की सफलता के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इस अवसर पर मुख्य रूप से रामकृष्ण भारद्वाज, राजेंद्र सिंह, रमाकांत भारती, सीताराम चौहान, अतहर अंसारी, मुमताज अली खान, माधव यादव, उमेश चंद, जितेंद्र सिंह, शिवप्रसाद श्रीवास्तव, श्रीप्रकाश वर्मा, संजय सिंह, शिवप्रसाद श्रीवास्तव, संजय सिंह, दीनानाथ राजभर, सुभाषचंद राजभर आदि रहे।