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शासन के उपेक्षात्मक रवैये से किसानों में उबाल

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कोरौली। अघोषित बिजली कटौती तथा सभी फीडरों को समान रूप से विद्युत आपूर्ति न करने से लोगों में आक्रोश पनप रहा है। कम बिजली मिलने से मड़ाई कार्य ठप है। 16 घंटा के सापेक्ष लगातार छह घंटे भी बिजली नहीं मिल पा रही है। सिंचाई के अभाव में सब्जी, गन्ना सहित अन्य फसलें सूख रही है। परेशान लोगों ने आला अधिकारियों को शिकायती पत्र दिया बावजूद विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया जा सका है। इससे लोग आक्रोशित हैं।
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गोंठा विद्युत उपकेंद्र से दर्जनों गांवों को बिजली आपूर्ति की जाती है। मौसम परिवर्तन को देखते हुए किसान अपनी फसल को घर में लाने के लिए जुगत में लगे हुए हैं, लेकिन बिजली उनका साथ नहीं दे रही है। किसानों की मानें तो अमिला फीडर से जुड़े क्षेत्रों में 16 घंटे की बिजली आपूर्ति की जा रही है। जबकि जीयनपुर, लामी फीडर से संबद्ध लामी, तारनपुर, सियरही बर्जला, रुद्रपुर, मानिकपुर सहित दर्जनों गांवों मेेें लगातार छह घंटे भी नहीं मिल पा रही है। किसानों का दर्द है कि विद्युत उपकेंद्र के सभी फीडरों समान रूप से विद्युत आपूर्ति नहीं की जा रही है। पर्याप्त बिजली न मिलने से मड़ाई कार्य नहीं हो पाया है। मौसम में आए बदलाव से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई दे रही है। परेशान किसान सभी फीडरों पर समान विद्युत आपूर्ति किए जाने के लिए आंदोलन करने की रणनीति तय करने में जुट गए हैं। इस संबंध में श्रीप्रकाश राय, ब्रजेश राय, कैलाश मिश्र का कहना था कि पहली बार बिजली देने के मामले में भेदभाव बरता जा रहा है। अमिला फीडर पर 16 घंटे दी जा रही है, जबकि अन्य फीडरों को कम बिजली मिल रही है। उन्होंने कहा कि सभी फीडरों से समान रूप से विद्युत आपूर्ति नहीं की गई तो लोगों का गुस्सा कभी भी फूट सकता है। इस बाबत विद्युत वितरण खंड दोहरीघाट क्षेत्र के अवर अभियंता का कहना था कि ट्रांसमिशन से ही शेड्यूल का निर्धारण होता है।
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