मऊ। जिले के औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित उद्योगों पर संकट के बादल छटने का नाम नहीं ले रहा है। विगत तीन-चार वर्षों से फास्ट मूव एरिया घोषित होने के बाद से ही विकास शुल्क समेत कई करों का बोझ बढ़ गया है। 70 उद्योगों पर ताले लग चुके हैं। 80 उद्योग किसी तरह से सांस ले रहे हैं। आठ प्लाट अभी तक आवंटित नहीं हो सके हैं। यहां से उद्यमियों का मोहभंग हो रहा है।
जनपद बनने के एक साल बाद वर्ष 1990 में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हुई। यहां पर उद्योगोें को लगाने के लिए 275 प्लाट स्थापित किए गए। अभी तक महज 267 प्लाट ही आवंटित हो सके हैं। आठ प्लाट अभी तक खाली पड़े हुए हैं। शुुरुआती दौर में स्लो मूव एरिया घोषित होने के चलते विकास शुल्क समेत कई करों से उद्यमियों को राहत थी। लेकिन तीन-चार वर्षों से ऐसे हालात में फास्ट मूव एरिया क्या घोषित कर दिया गया कि ज्यादातर उद्योग बंद होनेे लगे। अब इनकी संख्या 70 तक पहुंच गई है। वर्तमान में 80 उद्योग ही संचालित हो रहे हैं। खास तौर पर आटा चक्की 5, जरी की 12 मशीनें, बेकरी की 3, पशु आहार की एक, आइस की तीन समेत अन्य हैं। उद्योगों के बंद होने की सुधि किसी को भी नहीं है। हालात यह हो गए हैं कि जो भी उद्योग संचालित हो रहे हैं। किसी तरह से सांस ले रहे हैं। सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। यहां तक की माल के आयात-निर्यात के लिए केंद्र की भी स्थापना नहीं हो सकी है।