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जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का बुरा हाल

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मऊ। जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का बुरा हाल है। योजना के तहत अभी तक किसी को लाभ नहीं प्राप्त हो सका है। स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना को बंदकर उसके बदले राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए लक्ष्य निर्धारित किया है। एक जुलाई 2013 से लागू यह योजना अभी भी आजीविका के एक भी साधन स्वयं सहायता समूहों को नहीं उपलब्ध करा पाई है। लक्ष्य के सापेक्ष महिला समूहों का गठन भी नहीं किया जा सका है। जैसे-तैसे 64 समूहों का चयन कर उन्हें रोजगार के लिए ऋण आदि के लिए प्रोत्साहित किए जाने की प्रक्रिया भी चली लेकिन वह भी चुनाव आचार संहिता के कारण भेंट चढ़ गई। अब 16वीं लोकसभा का गठन के बाद ही यह आजीविका मिशन की यह योजन अभी भी जीविका के लिए संघर्ष कर रही है।
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एक जुलाई 2013 को गांवों में वर्षों से चल रही स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना को बंद करके इसके बदले में भारत सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना की शुरुआत की। इस योजना में पूर्व की योजना की अपेक्षा काफी बदलाव किया गया। पूर्व में जहां महिला, पुरुष, व्यक्तिगत स्वरोजगारियों का गठन किया जाता था, वहीं राष्ट्रीय ग्रामीण योजना में महज महिला समूहों का ही गठन किया जाना है। वर्ष 2013-14 के लिए इस योजना के तहत पूर्व के गठित समूहों में से छांटकर 675 महिला समूहों का गठन किया जाना था। उसमें भी जिला प्रशासन ने महज 595 समूहों का ही गठन किया गया। जैसे तैसे समूहों के गठन के बाद इन्हें रोजगार देने की कवायद शुरू हुई तो इनमें 64 को दस हजार रुपये की दर से रिवाल्विंग फंड जारी किया गया लेकिन वह भी चुनाव आचार संहिता के लग जाने से बैंकों में डंप है। इसके चलते चिह्नित 64 महिला समूहों को भी रोजगार के लिए अभी काफी दिन तक इंतजार करना पड़ेगा। नई योजना के तहत रिवाल्डिंग के जारी होने के बाद ही बैंकों द्वारा समूहों को ऋण देने का प्रावधान है। इस प्रकार देखा जाए तो सारी कवायद के बाद भी यह योजना इस वर्ष अपने आजीविका मिशन में फेल साबित हुई।

स्वर्ण जयंती में गठित समूह
पूर्व में संचालित स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना में जिले में मूल 4072 समूहों का गठन किया गया था। इसमें 3860 समूह स्वरोजगारी, 212 व्यक्तिगत समूह एवं 386 ऋण वाले समूह के साथ ही 898 सामान्य समूहों का गठन किया गया था। इस प्रकार देखा जाए तो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना में समूहों का गठन पूर्व की अपेक्षा काफी कम हो गया है।
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स्वर्ण जयंती ग्राम स्वराज्य योजना के अपने लक्ष्य प्राप्त कर लेने के बाद सरकार ने उसे बंद कर सिर्फ महिला समूहों के गठन पर जोर दिया। संचालित समूहों में 595 महिला समूहों का गठन नई योजना के तहत किया गया है। इसमें 64 का रिवाल्विंग फंड के लिए धन भेज दिया गया है। लेकिन चुनाव आचार संहिता के चलते आगे का कार्य रुका हुआ है। बताया कि जिले में इस योजना के बाद में प्रारंभ होने के चलते समूहों के गठन एवं रिवाल्विंग फंड देनेे में कुछ देरी हुई।
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--- डा. हरिचरण सिंह, परियोजना निदेशक डीआरडीए
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