मऊ। कोरोना संक्रमण का असर स्वास्थ्य के साथ दूूसरे विकास कार्योें पर दिख रहा है। इसका असर बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग पर देखने को मिल रहा है। कोरोना संक्रमण के चलते दो साल से जिले के 800 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों को अपग्रेड करने का काम टल रहा है। इस वर्ष भी बीते मार्च माह तक 517 आंगनबाड़ी केंद्रों प्री प्राइमरी स्कूलों की तर्ज पर अपग्रेड करना था। इसके लिए बजट के साथ टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी, लेकिन लॉकडाउन के चलते कार्यदायी संस्था कार्य पूरा नहीं कर सकी। मार्च में यह कार्य पूूरा न होने से बजट लैप्स हो गया था। वहीं बीते वर्ष विभाग की लापरवाही से कार्य देर से शुरू किया गया, लेकिन जब तक संक्रमण की पहली लहर शुरू होने से लॉकडाउन घोषित होने से कार्य टल गया था।
जिले में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा नौ ब्लाकों में 2587 आंगनबाड़ी केंद्रो का संचालन किया जाता है, जिसमें दो लाख 20 हजार से अधिक बच्चें पंजीकृत है। इन केंद्रों में पंजीकृत बच्चों को अब भी नीचे बैठकर पढ़ना पड़ता है। इसको देखते हुए विभाग ने दो वर्षों से इन केंद्रों में 800 से ज्यादा केद्रों को प्री प्राइमरी स्कूल के तर्ज पर संचालित करने के लिए अपग्रेड करने की योजना तैयार की है। विभाग की योजना के अनुसार इस वर्ष 517 केंद्रों में कुर्सी के साथ पेयजल, शौचालय, विद्युतीकरण की समस्या दूर करना है। इसके अलावा बच्चों के रखने के लिए किताबें रखने के लिए मेज के साथ मनोरंजन के लिए झूले आदि सामान लगाए जाने थे। यह कार्य मार्च 2021 तक हो जाना चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
विभागीय सूत्रों की माने तो इस कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी करने के साथ बजट अवमुक्त भी किया गया था, लेकिन इसमें काफी देर कर दी गई, जब तक यह कार्य होता तब तक कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शुरू होने के चलते वित्तीय माह भी समाप्त हो गया। इसके चलते कार्यदायी संस्था ने कार्य करने में असर्मथता जता दी। ऐसे में कार्य शुरू न होने से इस वर्ष का बजट भी लैप्स हो गया।
ऐसी ही स्थिति बीते वर्ष भी 200 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों को अपडेट करने में हुई। पहले तो विभाग द्वारा हीलाहवाली की गई, जब तक कार्य शुरू होता जब तक कोरोना संक्रमण की पहली लहर शुरू होने से लॉकडाउन घोषित होने से कार्य टल गया। इस मामले में जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश कुमार का कहना है कि कोरोना संक्रमण को लेकर घोषित लॉकडाउन में कार्यदायी संस्था न सामान की सप्लाई करने में असमर्थता जता दी। ऐसे में कार्य न होने की स्थिति में भुगतान न होने पर बजट लैप्स हो गया था।
... तो 38 हजार से ज्यादा बच्चों को मिलता लाभ
मऊ। आंगनबाड़ी केंद्र अगर समय सीमा में अपग्रेड हो जाते तो इसमें पंजीकृत 38 हजार से ज्यादा बच्चों को स्कूलों की तर्ज पर मिलनी वाली सुविधा मिलती है। इतना ही नहीं केंद्र भी बेहतर और स्वच्छ दिखता। इससे बच्चों के साथ उसके अभिभावकों में भी केंद्रों को लेकर सकारात्मक छवि बनती।