दोहरीघाट। कस्बा के मद्धेशिया वैश्य धर्मशाला में चल रही श्री राम कथा के सातवें दिन अयोध्या धाम से पधारे परम पूज्य अवधेश महाराज ने कहा कि दान कुपात्र को करोगे तो दरिद्र के घर जन्म लोगे। यदि सुपात्र को करोगे तो यश मिलेगा। प्रसाद खाने से वैभव की वृद्धि होती है।
उन्होंने कहा कि भगवान राम दया प्रेम करूणा के सागर हैं। भगवान कथा सुनो मत सुनो पर विरोध कथा का मत करो। कथा भगवान को मुस्कुराते हुए सुनिए। अहंकार जीवन में बहुत दु:ख देता है।शत्रु के प्रति भी श्रीरामजी को हृदयता है। बुद्धि की शरण में जाना होता है। अहिंसा धारण करके समाधि लगानी होती है। उनकी स्थिति दूसरी होती है लेकिन जो तत्वज्ञ पुरुष है उनके लिए तो जीवन मरण नरक, स्वर्ग, हिंसा, अहिंसा सब कुछ समत्व मे समा जाते हैं। सत्पुरूष को तो केवल हित चाहिए। वे भूखे रहने में हित हो तो भूखे रहे खाने में हित हो तो खाये घर मे रहने में हित हो तो घर मे रहे और बाहर रहने में हित हो तो बाहर रहें। श्रीरामचंद्र जी ऐसे सतपुरुष हैं कि वे सबका हित चाहते हैं। कथा में दिव्य झांकियां भी दिखाई गई। वही राम विवाह पर मंगलगीत गाया गया।मिथिला नगरीया निहाल सखियां ,चारों दुल्हा में बड़का कमाल सखियां सुनाकर श्रोताओं को भक्ति के सागर में डुबो दिया। वहीं, खूब पूड़ी मिठाई खिलाई गई। इस अवसर पर लक्ष्मी नारायण राय, सीताराम पटवा, गुलाब चंद, ध्रुवचंद्र, विनोद आदि शामिल रहे।