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सर्दी में हार्ट अटैक का खतरा 30 फीसदी अधिक

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मऊ। सर्दी में अपने शरीर के विशेष अंग ह्दय को बचाने की ज्यादा जरुरत होती है, क्योंकि सर्दी के सीजन में हार्ट अटैक का खतरा 31 फीसदी तक बढ़ जाता है। चिकित्सकों की सलाह है कि 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को लेकर इसको लेकर विशेष सर्तकता बरतने की जरूरत है। साथ ही समय समय पर अपने ब्लड प्रेशर तथा कोलेस्टाल की जांच कराने का सुझाव देते है।
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वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संजय सिंह बताते है कि सर्दी के सीजन में हार्ट के मरीजों को विशेष सर्तकता बरतने की जरुरत है। बोले कि इन दिनों सोते समय शरीर की एक्टिविटीज स्लो हो जाती हैं। बीपी और शुगर का लेवल भी कम होता है। लेकिन उठने से पहले ही शरीर का ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम उसे सामान्य स्तर पर लाने का काम करता है। यह सिस्टम हर मौसम में काम करता है। लेकिन ठंड के दिनों में इसके लिए दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे जिन्हें हार्ट की बीमारी है, उनमें हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
बताया कि ठंड के मौसम में नसें ज्यादा सिकुड़ती हैं और सख्त बन जाती हैं। इससे नसों को गर्म और एक्टिव करने के लिए ब्लड का फ्लो बढ़ जाता है जिससे ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने से हार्ट अटैक होने का खतरा भी बढ़ जाता है।बोले कि ऐसे में जिन्हें पहले से ही दिल की बीमारी है या जिन्हें पहले भी हार्ट अटैक हो चुका है, उनके लिए ज्यादा ठंड जानलेवा हो जाती है।
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दिल के मरीज इन बातों का रखें ख्याल
डॉ. संजय सिंह बताते है कि जिन्हें दिल की बीमारी होती है, उनके दिल को वैसे भी पम्प करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में अगर आप बहुत ज्यादा पानी पी लेंगे तो हार्ट को पम्पिंग में और भी मेहनत करनी पड़ेगी और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाएगा।दिल के मरीजों को अपने खाने में नमक की मात्रा कम से कम लेनी चाहिए, केवल इस वजह से ही नहीं कि यह ब्लड प्रेशर की समस्या को बढ़ा देगा, बल्कि इसे ध्यान में रखें कि नमक शरीर में पानी को रोकता है। पानी को रोकने का मतलब यही होगा कि शरीर में दिल को ज्यादा मात्रा में लिक्विड को पम्प करना होगा। यानी ज्यादा मेहनत करनी होगी। नतीजा हार्ट अटैक के रूप में आ सकता है। कहा कि जिन लोगों को पहले भी हार्ट अटैक आ चुका है या जिनके दिल पर ज्यादा खतरा है, वे ठंड के दिनों में न तो बिस्तर जल्दी छोड़ें और न ही जल्दी सैर पर जाएं।
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