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गुरुओं की प्रेरणा से मिली युवाओं को मंजिल

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हर इंसान के जीवन में कोई न कोई ऐसा शिक्षक या गुरु होता है। जिसकी प्रेरणा से वह अच्छे मुकाम पर पहुंच जाता है। सफल होने के बाद व्यक्ति जीवनभर उस शिक्षक अथवा गुरू को याद करता है। गुरुओं की प्रेरणा से जिले के कई छात्र मंजिल पाने में सफल हुए हैं। कोई पीसीएस, वैज्ञानिक तो कोई इंजीनियर पद पर कार्यरत हैं।
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परदहां ब्लाक क्षेत्र के ताजोपुर गांव निवासी डॉ. संजय सिंह कठिन परिश्रम की बदौलत राष्ट्रीय पादक प्रौद्योगिकी केंद्र नई दिल्ली में प्रधान वैज्ञानिक पद पर कार्यरत हैं। नगर स्थित जीवन राम इंटर कालेज से हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद नरेेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय से बीएससी तथा एमएसएसी कृषि किया। डॉ. संजय सिंह ने बताया कि जीवनराम इंटर कालेज के प्रवक्ता स्व. देवीभक्त सिंह के हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट में मार्गदर्शन के चलते मुकाम हासिल करने में सफलता मिली। उनके दिए गए टिप्स आज भी काम आते हैं।
रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के अतरौल पांडेयपुर निवासी नितिन मिश्र कड़े संघर्ष के चलते लोअर सबआर्डिनेट एग्जाम में परीक्षा नियंत्रक हैं। नितिन मिश्र ने डीएवी इंटर कालेज से इंटरमीडिएट तक परीक्षा पास की। इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए तथा एमए किया। वर्ष 2001 में पीसीएस में चयनित हुए। बताया कि डीएवी इंटर कालेज के शिक्षकों के मार्गदर्शन का आज भी लाभ मिल रहा है। गुरुओं के कड़े अनुशासन में रहने के चलते यह मंजिल मिली। इसके अलावा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष विद्याधर मिश्र ने पूरा सहयोग किया।
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कोपागंज ब्लाक क्षेत्र के कांछीकला निवासी अनिल कुमार चौहान ने सीमित संसाधन होने के बावजूद इंजीनियर पद हासिल कर ही दम लिया। अनिल कुमार ने नवोदय विद्यालय महुआर से 10वीं परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद रामरती देवी सीनियर सेकेंड्री स्कूल ललितपुर लुदुही से 12वीं उत्तीर्ण किर्या। 2016 में आईआईटी कानपुर से बीटेक तथा एमटेक किया। 2016 में ही समटोटल सिस्टम में साफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर के पद पर कैंपस सलेक्शन हो गया। अनिल का कहना था कि शिक्षकों के मार्गदर्शन से उनकी जिंदगी बदली।
अमिला कस्बा निवासी डॉ. अशोक कुमार गुप्ता एसजीपीजीआई लखनऊ में गैस्ट्रो सर्जन हैं। बाबा थानीदास इण्टर कालेज सोनाड़ीह से हाईस्कूल और शांतानंद स्वतंत्र भारत इंटर कालेज बायो से इंटर किया। बीएचयू वाराणसी से एमबीबीएस तथा एमएस की डिग्री हासिल करने के बाद वर्ष 1996 में एसजीपीजीआई में ही असिस्टेंट प्रोफ़ेसर गैस्ट्रो सर्जन पद पर नियुक्ति हो गई। कहा कि कालेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य राघव राज सिंह, शिक्षक विमलरंजन मुखर्जी, रामबली राय और शिवशंकर राय उनके प्रेरणास्रोत रहे।
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