विधवाओं के प्रति स्थापित नजरिए को बदलते हुए बंाकेबिहारी के धाम वृंदावन के आश्रय सदनों में रहने वाली विधवा और निराश्रित महिलाओं ने भगवान श्रीकृष्ण के साथ फूलों और गुलाल की होली खेली। इस दौरान सभी ने एक दूसरे पर खूब फूल बरसाए और गुलाल लगाया। सैकड़ों वर्ष से चली आ रही परंपरा को तोड़ विधवाओं ने होली खेलकर अपने बेरंग जीवन में रंग भरने का प्रयास किया।
विधवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रही संस्था सुलभ इंटरनेशनल के पुराना पागल बाबा मीरा सहभागिनी महिला आश्रय सदन में आयोजित होली महोत्सव में वृंदावन के छह आश्रय सदन की एक हजार विधवा, बेसहारा महिलाओं और अनाथ लड़कियाें ने सहभागिता की।
इस होली महोत्सव में महिलाओं ने एक दूसरे पर रंग बिरंगे फूल बरसाकर और गुलाल लगाकर होली के रस-रंग में सराबोर कर दिया। सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक ने कहा कि होली का आयोजन का मुख्य उद्देश्य वृंदावन की विधवाओं को सदियों पुरानी परंपराओं की बेड़ियों से मुक्त कराना है। महिलाएं आज कितनी खुश हैं, इनके चेहरे पर खुशी के भाव पढ़े जा सकते हैं। संस्था का यही उद्देश्य था। उन्होंने बताया कि इन विधवाओं ने न केवल फूल और गुलाल की होली मनाई, बल्कि अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया।
बनारस की महिलाएं भी शामिल हुईं
वृंदावन के आश्रय सदन में होली मनाने के लिए बनारस से भी 40 विधवाएं शामिल हुईं। बनारस से आईं सुनंदादासी ने बताया कि वह संस्था की ओर से आयोजित होली महोत्सव में शामिल होने आईं हैं, यहां आकर बेहद खुशी मिली है।
यह अनुभव अलग है
महिला आश्रय सदन में रह रहीं मधुदासी ने बताया कि यह बहुत ही अच्छा और अलग अनुभव है। हर वर्ष वे अपने तरीके से होली खेलती थीं, लेकिन इस बार एक नए आध्यात्मिक अंदाज में होली का आनंद लिया। दुर्गादासी दो दशक से वृंदावन में रहकर अपने प्रभु भक्ति कर रहीं हैं, वे कहतीं हैं कि वर्षों से उन्होंने कभी होली नहीं मनाई, त्योहार का मतलब ही भूल चुकी थीं, लेकिन आज अपने आराध्य को समर्पित कर होली खेली।