बगीचे में विराजे ब्रज के राधाधिराज के साथ रंग खेलना मंगलवार को श्रद्धालुओं के लिए विशेष अनुभव देने वाला क्षण रहा। अबीर और गुलाल के बादलों के बीच मंदिर प्रांगण रंगीन हो गया था। इसी बीच फाग और होली के गीतों के गायन में श्रद्धालु स्वयं को झूमने नहीं रोक सके।
प्राचीन द्वारिकाधीश मंदिर में होली पर विशेष आयोजन किया गया था। सुबह मंगला, ग्वाल और शृंगार की झांकियों के बाद दोपहर एक बजे राजाधिराज को बगीचे में विराजमान किया गया। आकर्षक झांकी के साथ होरी गायन के स्वर भी मुखर होने लगे।
‘आज बिरज में होरी रे रसिया, होरी रे रसिया बरजोरी रे रसिया’, फाग खेलन बरसाने आए हैं नटवर नंदकिशोर... आदि गीतों के साथ सेवायत मुखिया ब्रजेश और सुधीर ने अबीर, गुलाल और टेसू के फूलों से तैयार सुगंधित रंग की बौछार कर दी। जिसमें श्रद्धालु सराबोर हो गए।
यह अद्भुत आयोजन दोपहर ढाई बजे तक चला। शाम को साढ़े चार से पांच बजे तक शयन के दर्शन हुए। इस अवसर पर मंदिर अधिकारी श्रीधर चतुर्वेदी, विधि अधिकारी राकेश तिवारी, बनवारी लाल, मुरली, दीनानाथ आदि मौजूद रहे।