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अत्याचारी का अत्याचार बढ़ जाने पर घर से होती है क्रांति: साध्वी ऋतंभरा

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वृंदावन। साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि अत्याचारी का अत्याचार बढ़ जाता है तो घर से ही क्रांति हो जाती है। भक्त प्रह्लाद क्रांति के स्वर की तरह हैं। उनकी रक्षा के लिए नृसिंह भगवान प्रकट हो गए। लोग किसी की काया का वध कर देते हैं या रुष्ट होने पर थप्पड़ मार देते हैं, तो यह लोगों में क्षुद्र विचार एक-दूसरे के प्रति द्वेष के कारण आते हैं। यह विचार उन्होंने बृहस्पतिवार को वात्सल्य ग्राम में अपने जन्मोत्सव पर आयोजित वात्सल्य दिवस पर व्यक्त किए। इस दौरान स्कूल के बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। साथ ही भक्तों ने साध्वी का आशीर्वाद लिया।
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वैशिष्ट्यम की छात्राओं ने नृत्य नाटिका के माध्यम से द्रौपदी की विवशता, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उनकी लाज बचाने और फिर दुशासन वध के बाद स्त्री सशक्तिकरण का संदेश दिया। कृष्णा ब्रह्मरतन विद्यालय की छात्राओं ने भगवान शिव पर आधारित नृत्य नाटिका पेश की। ऑस्ट्रेलिया की साहित्यकार सोमा नायर ने कविता के माध्यम भारत की स्त्री शक्ति के विभिन्न रूपों को प्रस्तुत किया। जयपुर के चिकित्सक डाॅ. ओमेंद्र रत्नू ने पेश दी। किशन भैया ने भजन प्रस्तुत कर वातावरण को राधामय कर दिया।
इस बीच धर्म रक्षा संघ के पदाधिकारियों एवं संंत महंतों ने साध्वी ऋतंभरा को जन्मदिन की बधाई दी। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ देवी सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इस मौके पर संजय भैया, साक्षी चैतन्य सिंधु, साध्वी शिरोमणि, सत्यशील, रवि कान्त गर्ग, राधा प्रसाद देव, आदित्यानंद, रामदास, मोहिनी बिहारी शरण, सुतीक्ष्णदास महाराज, देवानंद, दशरथ महाराज, देवानंद परमहंस, सौरभ गौड़, संजय, रविकांत गर्ग, आशीष गुप्ता, निवेदिता उपस्थित रहे।
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