गोवर्धन। गांव गांठौली में राधा-कृष्ण युगल सरकार ने जम कर गुलाल से होली खेली थी। गुलाल में सराबोर हुए शरीर और मुंह को साफ करने के लिए उन्होंने जिस कुंड में मुंह धोया, उसका नाम गुलाल कुंड पड़ गया। गांव गांठौली को ऋषि गर्गाचार्य की तपोस्थली माना जाता है। यहां स्थित गुलाल कुंड में आज भी राधा कृष्ण के होली खेलने के साक्षात प्रमाण पाए जाते हैं।
गोवर्धन से मात्र तीन किमी दूर गांव गांठौली में कृष्णकाल का एक कुंड बना हुआ है। यह गांव कभी ऋषि गर्गाचार्य की तपोस्थली था। यहां राधा और कृष्ण सखियों के संग गुलाल की होली खेलते थे। इसमें फाल्गुन मास के दौरान प्रेम से सरावोर अबीर-गुलाल से युगल सरकार ने सखियों संग महारास के दौरान जो होली खेली तो तीनों लोक आलौकिक लीला के दर्शनों के लिए ठहर गए। धार्मिक ग्रंथों में राधा-कृष्ण की होली लीला के बाद कुंड के पानी से मुंह धोने का वर्णन है।
मान्यता है कि फाल्गुन मास में अभी भी कुंड के पानी में गुलाबी रंग नजर आता है। होली लीला के पौराणिक मान्यता से जुड़े कुंड की शोभा इसके चारों ओर लगे कदंब के वृक्षों से बहुत सुंदर लगती है। कुंड पर महाप्रभु जी की बैठक और ब्रज चौरासी कोस यात्रा का पड़ाव स्थल भी है। उसी लीला के दर्शन कर और उसमें शामिल हो श्रद्धालु खुद को धन्य मानते हैं। ब्रज यात्राओं के दौरान भी श्रद्धालु कुंड पर गुलाल आदि से पूजा अर्चना कर अपने आराध्य प्रिया-प्रियतम के साथ होली लीला करते हैं।