मथुरा। नौहझील क्षेत्र में खेतों में खड़ी फसलों में भरा यमुना का पानी।
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मथुरा। यमुना का जलस्तर धीरे-धीरे नीचे आ रहा है। रविवार को जलस्तर घटकर चेतावनी बिंदु 165.20 के निकट पहुंच गया है। बीते दो दिन से लगातार जलस्तर घटने से लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि किसानों की परेशानी अभी बरकरार है। जलमग्न होने से सैकड़ों बीघा फसलें नष्ट हो गई हैं। वहीं कुछ कॉलोनियों में अभी भी पानी भरा हुआ है। प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीम लोगों की मदद में जुटी है।
यमुना का जलस्तर बढ़ने के बाद जयसिंहपुरा, यमुना खादर की दर्जनों कॉलोनियां बाढ़ की चपेट में आ गईं। कई गांवों के मार्ग बाधित हो गए और सैड़कों बीघा फसलें डूब गईं। लोगों के आवागमन के साथ-साथ जनजीवन भी अस्त-व्यस्त हो गया। बीते एक सप्ताह से प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीमें लोगों को मदद करने में जुटी हुई हैं। नष्ट फसलों का सर्वे कराया जा रहा है और बाढ़ प्रभावित लोगों को खाद्य सामग्री भी बांटी जा रही है। हालांकि बीते दो दिन से यमुना का जलस्तर घटने से लोगों ने राहत की सांस ली है। बीते 24 घंटे में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान 166.00 मीटर से घटकर रविवार शाम को 165.45 मीटर तक आ गया है, जबकि शनिवार शाम को यह आंकड़ा 165.65 मीटर पर था।
सिंचाई विभाग अपर खंड के एक्सईएन नवीन कुमार ने बताया कि रविवार शाम को हथिनीकुंड से 31108 क्यूसेक और ओखला से 25135 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जबकि गोकुल बैराज से 65860 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। गोकुल बैराज से अधिक मात्रा में पानी डिस्चार्ज होने से हालात को काबू में लाया गया है। अधिकारी-कर्मचारी लगातार बाढ़ प्रभावितों की मदद कर रहे हैं और सतर्कता भी बरत रहे हैं।