बलदेव। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) में बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को मतदाता सूची का प्रपत्र दे रहे हैं। वर्ष 2003 की मतदाता सूची में जिनका नाम नहीं है, उन शादीशुदा महिलाओं से उनके मायके का सबूत मांगा जा रहा है। इससे मतदाताओं में आक्रोश है।
मतदाताओं का कहना है शादी के 15-20 वर्ष बाद वह अपने मायके का सबूत कहां से लाएंगे। महिलाओं से उनकी हाईस्कूल व इंटर की मार्कशीट मांगी जा रही है। मायके की मतदाता सूची में उनके माता-पिता का नाम मांगा जा रहा है। व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष नंदो पंडित, नरेंद्र तेहरिया, बंशीधर तेहरिया, राजकुमार वर्मा ने बताया महिलाएं अपने माता-पिता का मतदाता सूची में नाम कहां से लाएंगी। युवाओं से भी उनके माता-पिता का सबूत मांगा जा रहा है जो गलत है। चीनू पांडेय, सोनू अग्रवाल, उमेश पांडेय, मुकेश अग्रवाल ने कहा कि 2003 की मतदाता सूची को मैप आधारित मानकर मतदाताओं को सूची से बाहर करने का प्रयास किया जा रहा है। ज्ञानेंद्र पांडेय, सीपी पांडेय, ब्रजेश पांडेय, कन्हैया पांडेय ने कहा जब मताधिकार का प्रयोग लगातार किया जा रहा है तो अब वह अपना मतदाता होने का सबूत कहां से लाएंगे।