मथुरा/नौहझील। लगातार जलस्तर बढ़ने से यमुना नदी उफान पर है। नौहझील क्षेत्र की सैकड़ों बीघा फसल यमुना के पानी में डूब गई है। करीब चार गांवों को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग अवरुद्ध हो गया है और गांव के चारों ओर पानी ही पानी नजर आ रहा है। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। खतरा को देखते हुए अधिकारियों ने नौहझील क्षेत्र में डेरा डाल लिया है। इधर, वृंदावन के केसी घाट से सटे निवासियों से भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
नौहझील के अड्डा मीणा, फिरोजपुर, मांगलखोर और अड्डा जाटव गांव के चारों ओर यमुना का पानी भर गया है। इससे ग्रामीण दहशत में हैं। करीब 250 से 300 बीघा फसल पूरी तरह से जलमग्न हो गई है। ग्रामीणों के घरों के दरवाजे तक पानी पहुंच गया है। गांव को जाने वाला संपर्क मार्ग भी बाधित हो गया है। अधिकारियों ने गांव से पहले बैरिकेडिंग करके मार्ग को बंद कर दिया है। यह संपर्क मार्ग इन गांवों को जोड़ता है।
गांव छिनपारई में स्थित परिषदीय संविलित विद्यालय में दो-दो फीट पानी भर गया और कई ग्रामीणों के घरों तक पहुंच गया। ऐसे में छात्रों की पढ़ाई पर भी संकट गहराता जा रहा है। बाढ़ का खतरा बढ़ने से ग्रामीण दहशत में हैं और किसान की धड़कने बढ़ने गई हैं। अधिकारियों ने ग्रामीणों को सतर्क रहने को कहा है। साथ ही क्षेत्र में बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं। खतरा बढ़ने पर ग्रामीणों को राहत शिविरों में पहुंचाया जाएगा। प्रशासन की टीम शनिवार से ही क्षेत्र में डेरा जमाए हुए है।
इसके अलावा सुरीर, मथुरा शहर, वृंदावन, महावन, बलदेव क्षेत्र में सतर्क बरती जा रही है। ये भी बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों हैं। हालांकि अधिकारियों ने रविवार को पानी कम होने का दावा किया है, लेकिन हकीकत यह है कि यमुना का जलस्तर 165.36 से बढ़कर 165.56 मीटर तक पहुंच गया है। यह चेतावनी बिंदु 165.200 मीटर से महज कुछ ही कम है।
सिंचाई विभाग अपर खंड के एक्सईएन नवीन कुमार ने बताया है कि रविवार को ताजेवाला बैराज से 16847 क्यूसेक और ओखला बैराज से 28910 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि मथुरा के गोकुल बैराज से 75000 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। इसके बावजूद रविवार को यमुना का जलस्तर बढ़कर 165.56 मीटर पहुंच गया।
राहत चौकियों की हुई स्थापना
प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। प्रशासनिक अधिकारियों ने खुद मौके पर डेरा डाल लिया है और लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। राहत और बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए झाड़ी हनुमानजी मंदिर और जनता ऑडिटोरियम में अस्थायी बाढ़ व राहत चौकियां स्थापित की गई हैं। इन चौकियों पर आवश्यकतानुसार खाद्य सामग्री, पीने का पानी, प्राथमिक चिकित्सा आदि की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
ग्रामीणों की उड़ी रातों की नींद
गांवों के चारों ओर पानी आने से ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ गई है। भूरी, अनिल, राहुल, जयदेव, वीरेंद्र, अवधेश आदि ने बताया कि वह रातभर जागकर काट रहे हैं। गांवों के चारों ओर पानी भरा हुआ है। इन गांवों के किसानों की सैकड़ों बीघा ज्वार, बाजरा और धान की फसलें पूरी तरह से जलमग्न हो गई हैं। इससे किसानों को गंभीर आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। वहीं ग्रामीणों को पशुओं के लिए चारे की भी चिंता सता रही है। किसानों सुनील, बृजेश, महादेव, रघुवीर ने कहा कि खेती से ही घर का परिवार का खर्चा चलता है। अगर फसल पूरी तरह नष्ट हुई किसान संकट में आ जाएंगे।
प्रभावित क्षेत्रों की निरंतर हो रही निगरानी: डीएम
इधर, बाढ़ का खतरा बढ़ने पर डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने महावन, नौहझील, वृंदावन और मथुरा में यमुना के जलस्तर का हाल जाना। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को यमुना से सटे क्षेत्रों में निगरानी और सतर्क रहने को कहा है। साथ ही ग्राम प्रधान, सचिव, लेखपाल तथा तहसीलदार को प्रभावित फसलों का सर्वे, क्षतिग्रस्त मकानों के परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि जिले में 33 बाढ़ चौकियां स्थापित कराई गई हैं, 25 स्थानों पर बाढ़ शरणालय स्थल बनाए गए हैं। निचले क्षेत्रों पर नियमित निगरानी की जा रही है। रविवार को सुबह 8 बजे से यमुना के जल स्तर में निरंतर गिरावट आ रही है। आगामी 24 घंटे में पानी और कम हो जाएगा।