गांव बछगांव में जूता-चप्पल मारकर होली खेलते गांव के लोग।
सौंख। ब्रज में कहीं रंगों की तो कहीं लठामार और कपड़ा फाड़ होली होती है। कहीं लड्डू तो कहीं फूलों की होली खेली जाती हैं, लेकिन ब्रज में एक ऐसा भी गांव हैं जहां होली खेलने की अनूठी परंपरा है। खुटैलपट्टी के गांव बछगांव में लोग होली वाले दिन एक दूसरे को गुलाल लगाकर जूता-चप्पल मारकर होली खेलते हैं। साथ ही त्योहार की शुभकामनाएं देते हैं।गांव वालों का कहना है कि यहां इस होली की परंपरा करीब 155 साल पुरानी है।
गोवर्धन तहसील के गांव बछगांव में विगत सैकड़ों वर्षों से जूता-चप्पल मारकर होली मनाने की परंपरा है। गांव निवासी लक्ष्मण चौधरी और योगेश कुंतल ने बताया कि यह परंपरा 155 वर्ष पुराना है। जूते-चप्पल मार होली अंग्रेजों द्वारा किए गए जुल्म का विरोध करने के लिए खेली जाती थी। तभी से इस तरह की होली यहां की परंपरा बन गई। होली में एक खास बात ये भी कि कोई भी किसी को जूता-चप्पल मारकर होली की शुभकामनाएं देता है। इसके बाद बुजुर्ग होली, ब्रजगीत, रसिया समेत अन्य प्रकार की गीतों से भजन कीर्तन करते हैं।
हालांकि इस होली में कुछ नियम भी हैं। गांव के लोग बताते हैं कि होली की यह परंपरा समान उम्र के लोगों में होती है। यानी कोई भी छोटा किसी बड़े-बुजुर्ग के साथ ऐसा नहीं करता है। वह हमउम्र को ही गुलाल लगाने के बाद जूते-चप्पल मारता है और होली की शुभकामना देता है।
गांव बछगांव में जूता-चप्पल मारकर होली खेलते गांव के लोग।