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बंद हो गए संस्कृत के दो माध्यमिक विद्यालय

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मथुरा। धर्म नगरी मथुरा में संस्कृत शिक्षा दम तोड़ रही है। शिक्षक और संसाधनों के अभाव में जनपद के कई संस्कृत विद्यालयों में छात्रों की संख्या कम होती जा रही है। दो माध्यमिक संस्कृत विद्यालय अब बंद हो गए हैं। इन दोनों संस्कृत विद्यालयों में छात्र संख्या शून्य है। हालांकि इस स्थिति से संस्कृत विद्यालयों को बचाने के लिए सरकार ने मानदेय पर शिक्षकों की नियुक्ति का आदेश दिया है, लेकिन जनपद के संस्कृत विद्यालय प्रबंधकों का रुझान अब तक इस ओर कम ही दिखा है।
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भगवान श्रीकृष्ण जन्मस्थान और लीला स्थली मथुरा शिक्षा का भी केंद्र है। यहां बड़ी संख्या में वेद और पुराण की शिक्षा दी जाती रही है। संस्कृत शिक्षा के भी अनेक विद्यालय हैं। इसमें 13 माध्यमिक विद्यालय अनुदानित हैं तो पांच विद्यालयों में माध्यमिक और डिग्री कोर्सेज संचालित हो रहे हैं। पांच मान्यता प्राप्त विद्यालय निजी स्तर पर संचालित हैं। लेकिन, इन अधिकांश संस्कृत शिक्षा केंद्रों की स्थिति निरंतर कमजोर हो रही है।
छात्र और शिक्षकों की संख्या के साथ संसाधनों का भी अभाव होता जा रहा है। जिलाविद्यालय निरीक्षक कार्यालय की रिपोर्ट बताती है कि सेठ विशन दयाल संस्कृत माध्यमिक विद्यालय और रंग लक्ष्मी संस्कृत माध्यमिक विद्यालय वृंदावन में शिक्षण कार्य बंद हो गया है। अब यहां कोई भी छात्र पंजीकृत नहीं है। हालांकि शासन ने संस्कृत विद्यालयों को इस स्थिति से बचाने के लिए मानदेय पर शिक्षकों की नियुक्ति का अधिकार दिया है, लेकिन जनपद के अधिकांश विद्यालयों ने इस दिशा में पहल नहीं की है।
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अब तक सिर्फ तीन विद्यालय प्रबंधक ही इसके लिए आगे आए हैं। इसमें गुरु कार्ष्िण माध्यमिक संस्कृत विद्यालय महावन, बलभद्र संस्कृत विद्यालय बलदेव और सेठ लक्ष्मीनारायण संस्कृत विद्यालय बरसाना शामिल है। जिलाविद्यालय निरीक्षक डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने मानदेय पर शिक्षकों की नियुक्ति के आदेश दिए हैं। जनपद के अनुदानित संस्कृत विद्यालयों के प्रबंधकों को इस पर काम करना चाहिए।
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