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Mathura News: कोविड के बाद से और बढ़ गया आयुर्वेद पद्धति पर विश्वास

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मथुरा। कोविड महामारी के बाद से ही चिकित्सा व्यवस्था की तस्वीर बदल गई है। लोग अब आयुर्वेद पर भी उतना ही विश्वास जता रहे हैं, जितना एलोपैथी दवाओं पर है। किराए अथवा दान की जमीन पर संचालित आयुर्वेद के अस्पतालों में प्रतिमाह करीब 20 हजार लोग इस पद्धति में इलाज ले रहे हैं।
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जिले में आयुर्वेद का वृंदावन में 15 बैड का अस्पताल है। यहां लोग अपना उपचार करा रहे हैं। इसके अलावा शहर में औरंगाबाद, भरतपुर गेट पर डिस्पेंसरी में भी पूरे दिन भीड़ लगी रहती है। वृंदावन स्थित अस्पताल में प्रतिमाह करीब 1500 लोग उपचार कराते हैं। जबकि पूरे जिले में संचालित डिस्पेंसरी में 20 हजार से अधिक लोग प्रतिमाह उपचार के लिए आ रहे हैं।
जिला क्षेत्रीय आयुर्वेद यूनानी अधिकारी डॉ. गोपाल सिंह ने बताया कि आयुर्वेद का मुख्य कार्यालय कृष्णानगर स्थित जैन चौरासी इंटर कॉलेज के पास है। पूरे जिले में 33 आयुर्वेद चिकित्सक हैं। जबकि 34 फार्मासिस्ट और दो नर्स की अभी आवश्यकता है। इसके सापेक्ष 4 फार्मासिस्ट और एक नर्स ही उपलब्ध है।
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आयुर्वेद को बढ़ाने के प्रयास, पर सुविधाओं के नहीं
केंद्र और प्रदेश सरकार भी आयुर्वेद को बढ़ाने और लोगों को आयुर्वेद से जोड़ने का खूब प्रयास कर रही है। बावजूद इसके जिले में संचालित 34 डिस्पेंसरी में से मात्र 13 ही अपनी जमीन पर बनी हुई हैं। 9 डिस्पेंसरी किराए के भवन में निशुल्क हैं, एक दान की जमीन पर चल रही है तथा तीन किराए के भवन में संचालित हो रही हैं। इसके अलावा तीन सीएचसी तथा तीन पीएचसी पर तथा दो स्कूल भवनों में संचालित हैं।

इसलिए आयुर्वेद की ओर हो रहे आकर्षित
- आयुर्वेद चिकित्सकों की मानें तो इस पद्धति में बिना किसी साइड इफेक्ट्स के इलाज होता है। साथ ही यह बीमारी को जड़ से समाप्त करने में कारगर है। आयुर्वेद का उपचार भी काफी सस्ता पड़ता है। लोगों का लगातार आयुर्वेद पर विश्वास इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि यह पद्धति हमारी प्राचीन विद्या है। आने वाले समय में इसकी मांग और भी बढ़ने की संभावना है।
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