वृंदावन। नगर के कई बड़े क्षेत्रों में 14 साल पुरानी जर्जर बिजली की भूमिगत लाइन और पैनल जर्जर हो गए हैं। इससे बरसात के दिनों में आए दिन फाल्ट हो जाते हैं और नगरवासियों को घंटों तक विद्युत कटौती का सामना करना पड़ता है। लोगों की परेशानी को देखते हुए निगम ने सुधार का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। उच्चाधिकारियों ने छह माह पूर्व भेजे 2 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को रद्द कर दिया है। इससे आने वाले बरसात के समय में नगर के कई बड़े क्षेत्रों में हजारों लोगों को बिजली की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
विद्युत निगम द्वारा वर्ष 2012 में नगर के अधिकांश क्षेत्रों में बिजली की लाइनों को भूमिगत किया था। उस समय आवश्यकता अनुसार विभिन्न स्थानों पर पैनल भी लगाए गए थे। पिछले 14 वर्षों से इन लाइनों और पैनलों के रखरखाव या सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वर्तमान में पूरा सिस्टम जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है, जिससे जरा सी बारिश होते ही घंटों बिजली गुल रहना आम बात हो गई है।
इन क्षेत्रों पर मंडरा रहा है संकट
विद्युत अधिकारियों ने करीब छह माह पहले जर्जर लाइनों और पैनलों को बदलने के लिए प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय भेजा था। इस योजना से गौरानगर, गोविंद कुंड क्षेत्र, हरिदेव नगर, रामानुज नगर की विद्युत व्यवस्था में सुधार होना था।
वृंदावन एवं मथुरा से आवश्यकता अनुसार कई प्रस्ताव भेजे गए थे। इसमें उच्चाधिकारियों ने प्राथमिकता के आधार पर प्रस्तावों को स्वीकृति दी है, तो कुछ स्वीकृति मिलने से रह गए हैं। जो प्रस्ताव स्वीकृ़त नहीं हुए हैं। उन्हें पुन: आवश्यकता के अनुसार भेजा जाएगा, संभवत: आने वाले समय में उन्हें भी स्वीकृति मिल जाएगी। -मुदित तिवारी, एसई, विद्युत निगम