मथुरा। महापौर और पार्षदों में लंबे समय से चली आ रही रार दो घंटे की बैठक में थम गई। अब शहर का विकास कार्य रफ्तार पकड़ेगा।
रविवार को उपसभापति की अध्यक्षता में कृष्णानगर स्थित नए कार्यालय में महापौर, नगर आयुक्त और करीब 50 पार्षदों की समन्वय बैठक हुई। इस दौरान महापौर विनोद अग्रवाल ने सार्वजनिक रूप से खेद प्रकट किया। उनके इतना बोलने के बाद मौजूद पार्षद मुस्कराने लगे और रार समाप्त हो गई।
पार्षद दल के नेता चौधरी राजवीर सिंह ने बताया है कि महापौर ने पार्षदों की मांग को पूरा कर दिया है। अब सभी 70 वार्डों के पार्षदों के सामांजस्य से शहर का विकास रफ्तार पकड़ेगा। उन्होंने बताया है कि पार्षदों की मांग थी कि महापौर सभी पार्षदों के साथ बैठक करें और 15वीं वित्त ग्रांट से प्रस्तावित योजनाओं को मंजूरी दें। इन्हीं मांगों को लेकर पार्षद व महापौर के बीच कई बार गतिरोध देखने को मिला।
बीते शुक्रवार को रार और तूल पकड़ लिया था। इससे शहर का विकास दोनों पक्षों के गतिरोध में सिमट कर रह गया। इसे देखते हुए उपसभापति नगर निगम मुकेश सारस्वत ने रविवार को महापौर व पार्षदों की समन्वय बैठक बुलाई। उपसभापति ने बताया है कि बैठक में पार्षदों और महापौर के बीच रार समाप्त हो गई है। महापौर ने बैठक के दौरान कहा है कि मेरे कारण यदि किसी को कष्ट हुआ हो तो मैं खेद प्रकट करता हूं...मिलकर शहर का विकास करेंगे। हालांकि उन्होंने रार का मुख्य कारण पार्षदों से संवाद की कमी को माना है। राकेश भाटिया, नीरज वशिष्ठ, पार्षद पति तेजवीर सिंह, नीनू कुंजबिहारी भारद्वाज, ब्रजेश खरे समेत करीब 50 पार्षद मौजूद रहे।
अटके प्रस्तावों को मिली हरी झंडी
समन्वय बैठक से एक दिन पहले महापौर व नगर आयुक्त ने कमेटी के साथ बैठक की थी। इसमें 15वीं वित्त के अटके पड़े प्रस्तावों को हरी झंडी दी। इस दौरान कमेटी ने करीब 56 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इसमें सड़क व नाला निर्माण, वार्ड का सौंदर्यीकरण समेत विभिन्न कार्य शामिल हैं। कमेटी की बैठक में डीएम, नगर आयुक्त और निर्माण विभाग के अधिकारी औ एमवीडीए उपाध्यक्ष शामिल रहे।