मथुरा। डाक विभाग जाली टिकट लगाकर डाक भेजने वाले का पता लगाने के लिए सीबीआई का सहारा ले सकती है। इसके लिए जल्द ही विभाग द्वारा सीबीआई को पत्र भेजकर जांच के लिए गुजारिश की जाएगी। पूरा मामला खुलने के बाद भी विभाग डाक भेजने वाले आरोपी का पता लगाने में नाकाम रहा है।
छाता उप डाकघर से भेजी गईं 1.27 लाख डाक में 31.79 लाख रुपये के जाली टिकट लगाए जाने का मामला सामने आया था। दो कर्मचारियों को विभाग ने निलंबित कर दिया, लेकिन ये डाक भेजने वाला उनकी पहुंच से दूर है। कई नोटिस भी उसके नाम और पते पर भेजे गए, लेकिन उससे संपर्क नहीं हो सका। विभाग को तो यह भी नहीं पता कि जिस नाम और पते पर वह नोटिस भेज रहे हैं, वह असली है भी या नहीं।
ऐसे में अब विभाग पुलिस के साथ ही सीबीआई से मामले की जांच कराने के लिए प्रयास में जुट गया है। सीबीआई से जांच इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बुलंदशहर के डाकघर में हुए टिकट फर्जीवाड़े में सीबीआई पहले से ही जांच कर रही है। तीन आरोपियों को अब तक सीबीआई गिरफ्तार भी कर चुकी है। अधिकारियों को छाता उप डाकघर में हुए टिकट फर्जीवाड़े के तार बुलंदशहर से ही जुड़े होने का संदेह है। यही कारण है कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि सीबीआई से फर्जीवाड़े की जड़ तक पहुंचने में कामयाब हो सकती है।
-
एक रुपये का असली टिकट लगाने का भी नहीं है कोई जवाब
जांच में यह साबित हुआ था कि प्रत्येक लिफाफे पर कुल 26 रुपये के टिकट लगाए गए थे। इसमें से 25 रुपये के टिकट जाली थे और एक रुपये का टिकट असली था। ऐसे में विभाग को भी यह समझ नहीं आ रहा है कि आखिर ऐसा क्यों किया गया। जब 25 रुपये के टिकट जाली लगाए गए तो एक रुपये का टिकट भी जाली लगाया जा सकता है। इसका कोई पुख्ता जवाब विभाग के पास भी नहीं है। विभागीय अधिकारी कयास लगा रहे हैं कि किसी को संदेह न हो इसीलिए एक रुपये का टिकट असली लगाया गया था।
-
जाली टिकट लगार डाक भेजने वाले का पता अब तक नहीं चल सका है। उसे कई पत्र भेजे गए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मामले को सीबीआई को भेजने के साथ ही पुलिस जांच तक सभी पर विचार हो रहा है। जल्द ही उचित कदम उठाया जाएगा।
-विजेंद्र , प्रवर डाक अधीक्षक मथुरा।