वृंदावन। श्रीबांकेबिहारी लाल की सेवा परंपरा में आमों का विशेष महत्व है। फलों का राजा आम ठाकुरजी को अतिप्रिय है। वृंदावन के श्रीबांकेबिहारी मंंदिर में आम के तरह-तरह के बंगले सजाए जाते हैं। जिनमें ठाकुरजी विराजकर अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। वहीं उन्हें देसी-विदेशी आमों का भोग भी लगाया जाता है।
सेवायतों के अनुसार गर्मियों के लगभग चार महीनों तक मंदिर में बंगला सेवा की जाती है, जिसमें प्रतिवर्ष आमों से बना विशेष बंगला आकर्षण का केंद्र होता है। एक बंगला तैयार करने में लगभग 800 से 1000 किलोग्राम आमों का उपयोग किया जाता है। आरती के पश्चात इन आमों को श्रद्धालुओं में प्रसाद स्वरूप वितरित कर दिया जाता है।
आम से बने दिव्य पदार्थों को किया जाता है अर्पित
बिहारी जी को अर्पित की जाने वाली अमनिया सामग्री में आम से निर्मित विशेष व्यंजन जैसे आमरस, आम रबड़ी, आम कतली, आम बर्फी आदि प्रमुख रूप से तैयार किए जाते हैं। ये भोग पदार्थ न केवल भगवान की प्रिय वस्तु माने जाते हैं, बल्कि इनका स्वाद भी उनके भक्तों को दिव्यता का अनुभव कराता है।
देश-विदेश से मंगाए जाते हैं विशेष आम
आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी बताते हैं कि बिहारीजी के लिए उपयोग किए जाने वाले आम विशेष रूप से देश-विदेश से मंगवाए जाते हैं। इनमें कर्नाटक से रसपुरी, बादामी (अल्फांसो), तोतापुरी, महाराष्ट्र से हापुस (अल्फांसो), रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग के आम, उत्तर प्रदेश से दशहरी, लंगड़ा व सहारनपुर के आम प्रमुख हैं।
इसके साथ ही विदेशों से मंगाए जाने वाले प्रीमियम आमों में जापान का आम, चौसा व सिंधारी, मेक्सिको का अताउल्फो और टॉमी एटकिंस, थाईलैंड का चियांगमाई, अमेरिका का रोजिगोल्ड व स्पिरिट ऑफ 76, इंडोनेशिया का गेडोंग गिंचू तथा ऑस्ट्रेलिया का आर2इ2 शामिल हैं।
ऋतु प्रधान सेवा परंपरा का प्रतीक है यह आयोजन
बिहारीजी मंदिर की सेवा परंपरा ऋतु प्रधान है, जिसमें हर मौसम के अनुसार भगवान की सेवा, भोग और शृंगार किया जाता है। आमों का यह आयोजन गर्मियों में उस विशेष परंपरा का ही जीवंत उदाहरण है।