प्रियाकांत जू मंदिर में देवकीनंदन महाराज
- फोटो : अमर उजाला
वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर के साथ ही ठाकुर प्रियाकांतजू मंदिर में भी 27 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। श्वेत कमलपुष्प स्वरूप में बने मंदिर में प्रियाकांतजू सुनहरी पोशाक व सोने की बांसुरी धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे। देवकीनंदन महाराज सेवायत विप्रों के साथ बाल विग्रह का अभिषेक करेंगे। मंदिर में आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव में कृष्णभक्त श्रीमद्भागवत कथा श्रवण कर रहे हैं।
शुक्रवार को छटीकरा मार्ग स्थित प्रियाकांतजू मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराते हुए देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने कहा कि प्राण निकलने से पहले जिस विषय में प्राणी का चिंतन रहता है, उस योनि में उसे जाना पड़ता है। पता नहीं जीवन का कौन सा क्षण अंतिम हो, इसलिए हमेशा परमात्मा का चिंतन करते रहना चाहिए। कहा कि चिंतन से हर चिंता मिट जाती है। सद्कर्म करने से कर्मफल की चिंता नहीं रहती।
मंदिर के मीडिया प्रभारी जगदीश वर्मा ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर गर्भगृह को विशेष रूप से सुनहरे रंग में सजाया जा रहा है। राधा-कृष्ण विग्रह सुनहरी-पीली पोशाक के साथ चांदी के छत्र में सोने का मुकुट एवं सोने की बांसुरी धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे। मंगलवार रात 8.30 से मध्यरात्रि श्रीकृष्ण जन्म तक हजारों भक्त भजन संकीर्तन के साथ भगवान से प्रकट होने की मीठी मनुहार करेंगे।
12 बजे कन्हैया का अभिषेक होगा। मंदिर सेवायत दिनेश शर्मा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी को हुआ था। निंबार्क संप्रदाय के सिद्धांत से सूर्योदय के समय जो तिथि जो होती है, उसी तिथि को पूरे दिन माना जाता है । 27 अगस्त को उदयातिथि में अष्टमी तिथि आ रही है। इसलिए उसी दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत एवं अभिषेक किया जा रहा है।