मथुरा। नगर आयुक्त द्वारा दो अहम मामलों की स्वीकृति के लिए भेजी फाइल का जवाब महापौर ने सोशल प्लेटफार्म पर दिया है। उन्होंने कहा कि गृहकर के एक साल की ब्याज पर छूट सिर्फ निगम की बैठक में प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने पर ही दी जा सकती है। फाइल पर हस्ताक्षर से कर में छूट नहीं दी जा सकती है।
15वें वित्त से विकास कार्य के संबंध में महापौर विनोद अग्रवाल ने बताया कि पार्षदों से विकास कार्यों के प्रस्ताव आने के बाद उनका परीक्षण किया जाता है कि किस वार्ड में कार्य की अधिक आवश्यकता है। प्राथमिकता के आधार पर कार्यों का आवंटन किया जाता है न केवल उनके हस्ताक्षर से विकास कार्य हो सकते हैं।
पार्षदों से विकास कार्यों के प्रस्ताव आने पर उनका परीक्षण के बाद ही विकास कार्यों की अनुमति दी जाएगी। महापौर के इस पोस्ट का जवाब देते हुए सपा पार्षद दल के नेता एवं वार्ड 31 के पार्षद मुन्ना मलिक ने कहा कि वह किसी अधिकारी या नेता के कहने पर अपनी बात नहीं रख रहे हैं। शहर में विकास कार्य न होने के लिए महापौर जिम्मेदार हैं। इसलिए जनहित को ध्यान में रखते हुए महापौर को सभी पार्षद और अधिकारियों को साथ लेकर शहर का विकास में तेजी लानी चाहिए।
पिछले दिनों नगर आयुक्त शशांक चौधरी ने महापौर की स्वीकृति के लिए दो फाइलें भेजी थीं। इनमें शहरवासियों के लिए गृहकर जमा करने पर 10 प्रतिशत की छूट की समय सीमा बढ़ाने और 15वें वित्त से 35 करोड़ रुपये के निगम के सभी वार्डों में विकास कार्य कराने के लिए स्वीकृति चाही थी।