फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mathura News: स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन का समापन

विज्ञापन
ठाकुर राधास्नेह बिहारी जी मंदिर में आयोजित प्रस्तुति देते कलाकार। - फोटो : mathura
विज्ञापन
वृंदावन। ठाकुर राधा सनेह बिहारी मंदिर में आयोजित दो दिवसीय स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन एवं स्वामी हरिदास संगीत कला रत्न सम्मान समारोह का समापन मंगलवार को भावनाओं से परिपूर्ण वातावरण में हुआ।
विज्ञापन

महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. आदित्यानंद महाराज, आयोजन समिति के अध्यक्ष करन कृष्ण गोस्वामी, उपाध्यक्ष बिहारीलाल वशिष्ठ, संयोजक आचार्य रामविलास चतुर्वेदी एवं अनिल शास्त्री ने दीप जलाकर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार के मंत्री सुनील भड़ाला ने स्वामी हरिदास को संगीत जगत का सूर्य बताते हुए कहा कि स्वामी हरिदास ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई दिशा दी है। ऐसे कार्यक्रम हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रख्यात बांसुरी वादक पंडित चेतन जोशी ने भगवान श्रीकृष्ण के भजनों की तान छेड़कर भाव-विभोर कर दिया। तबला वादक हरिमोहन शर्मा और ललित मोहन शर्मा की जुगलबंदी ने मंच पर समा बांध दियाद्ध वहीं कथक नृत्यांगना गुरु रानी खानम ने श्री राधा-कृष्ण की लीलाओं पर आधारित कथक प्रस्तुति देकर दर्शकों की वाहवाही बटोरी।
विज्ञापन

संस्था के अध्यक्ष करन कृष्ण गोस्वामी ने बताया कि इस आयोजन की शुरुआत उनके पिताजी गोलोकवासी आचार्य अतुल कृष्ण गोस्वामी ने की थी और अब वे इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सतत प्रयासरत हैं। समारोह में कृष्ण मुरारी शर्मा, नकुल शर्मा, हरे कृष्णा गुप्ता, बिट्टू गोस्वामी, बालो पंडित, अरविंद गोस्वामी, प्रदीप गोस्वामी, रवि शर्मा, गिर्राज शर्मा समेत अन्य लोग उपस्थित रहे। संवाद

क्या बोले कलाकार
बांसुरी वादक पंडित चेतन जोशी ने कहा कि बांसुरी वादकों के आदि गुरु भगवान श्रीकृष्ण हैं। उनकी ख्याति जितनी बांसुरी वादक के रूप में है उतनी ही सुदर्शन चक्र धारी के रूप में है। बांसुरी से पवित्र और मधुर दूसरा कोई वाद्य नहीं है। शायद इसीलिए भगवान ने इसको चुना।
तबला वादक पंडित हरी मोहन शर्मा ने कहा कि स्वामी हरिदास जी के उत्सव में प्रस्तुति देने का अवसर एक बार फिर से मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। तबला वादन की डिमांड देश में भले कम हो, लेकिन विदेश में इसकी डिमांड बहुत है।
कथक नृत्यांगना गुरु रानी खानम ने कहा कि मंदिर परिसर में प्रस्तुति देना हर कलाकार के लिए सौभाग्य की बात है। प्राय: देखने में आता है कि वर्तमान में पाश्चात्य संगीत ज्यादा और शास्त्रीय संगीत कम है, लेकिन शास्त्रीय संगीत का प्रभाव बढ़ रहा है। इसमें एकाग्रता व शालीनता को दिखाएं और प्रेम का संदेश दें।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें