मथुरा। राजकीय शिशु सदन के बच्चों को कीड़े युक्त खाद्यान्न दिया जा रहा था। पोहा और सेंवई में कीड़े पड़ गए थे। यही नहीं, यहां के स्टोर में रखे बेसन, अरहर की दाल और तेल की स्थिति भी खराब थी। चाय के साथ खाये जाने वाले रस भी खराब थे। यह खुलासा डायरिया फैलने से एक दिन पहले राजकीय शिशु सदन पहुंची डिप्टी कलक्टर राजीव उपाध्याय के नेतृत्व वाली खाद्य विभाग की टीम ने किया था।
राजकीय शिशु सदन में डायरिया ने दो बच्चों की जान ले ली है। अभी 11 और बच्चे मथुरा और आगरा के अस्पतालों में भर्ती है। यह स्थिति यकायक उत्पन्न नहीं हुई, बल्कि शिशु सदन में स्थानीय स्तर पर लंबे समय से बरती जा रही लापरवाही इसका कारण बनी हैं। 27 अगस्त को ही यहां डिप्टी कलक्टर राजीव उपाध्याय खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को लेकर अचानक पहुंच गए थे। लंबे समय बाद कोई प्रशासनिक अधिकारी यहां निरीक्षण के लिए पहुंचे थे।
इस दौरान जब निरीक्षण किया तो स्थितियां भयावह मिलीं। शिशु सदन के स्टोर में रखे पोहा और सेवई के पैकेटों में कीड़े लग चुके थे। यह खराब हो चुके थे। टीम ने इन्हें तत्काल ही मौके पर ही नष्ट कराया। इसके अलावा स्टोर में रखीं खाद्य सामग्री में से बेसन, अरहर की दाल, तेल की स्थिति भी ठीक नजर नहीं आई। इसके लिए इनके नमूने लिए गए। साथ ही सुधार करने के लिए खाद्य विभाग ने राजकीय शिशु सदन को नोटिस भी जारी किया। इसके एक दिन बाद ही डायरिया ने राजकीय शिशु सदन के 12 बच्चों को अपनी चपेट में ले लिया। इसमें से दो की मौत उपचार के दौरान हो गई। वर्तमान में भी दो की स्थिति आगरा में उपचार के दौरान गंभीर बनी हुई है।
आगरा और वेटरनेरी विवि भेजे गए दूध और पानी के नमूने
राजकीय शिशु सदन में डायरिया से दो बच्चों की मौत के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम द्वारा लिए दूध और पानी के नमूने आगरा और वेटरनेरी यूनिवर्सिटी की प्रयोगशाला भेजे गए हैं। 72 घंटे के दौरान इनकी रिपोर्ट आने की संभावना है।
तीन दिन पहले डायरिया की चपेट में आए राजकीय शिशु सदन में डीएम के आदेश पर गत दिवस पहुंची खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने अपनी निरीक्षण रिपोर्ट शुक्रवार को उन्हें सौंप दी है। रिपोर्ट में निरीक्षण के दौरान मिली खामियों की भी दी है।