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Mathura News: जेल में 44 दिन राम नाम के सहारे काटे, केला और चना खाकर बिताए दिन

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- जेलर की पत्नी भेजती थी हवन सामग्री, जेल में राम के लिए होता हवन
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संवाद न्यूज एजेंसी
वृंदावन। राम जन्मभूमि आंदोलन को गति देने के लिए संतों की अगुवाई में हिंदूवादी संगठनों ने योजनाबद्ध तरीके से एक के बाद एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम किए। जयश्रीराम के उद्घोष के बीच दिल्ली में आयोजित धर्म संसद में आंदोलन को वृहद स्तर पर ले जाने योजना बनीं। संतों को जिम्मेदारी मिली थी, कि वह लाखों कारसेवकों को लेकर अयोध्या पहुंचे। वहीं प्रदेश में रामभक्तों पर पुलिस की कड़ी निगरानी थी। संतों और कारसेवकों को जेलों में ठूंसा जा रहा था।
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महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने बताया कि अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन के परवान चढ़ने से पहले दिल्ली में धर्म संसद हुई। इसमें स्वामी वामदेव महाराज और विहिप व बजरंग दल के नेता शामिल हुए। यहां से उन्हें जिम्मेदारी मिली के अधिकाधिक लोगों को अयोध्या लेकर पहुंचना है। स्वामी ओम चैतन्य व करीब 16 संतों के साथ उन्होंने गांव-गांव तांगे से प्रचार प्रसार किया। इस दौरान खाना-पानी मिलना मुश्किल हो रहा था। केला और चना खाकर कई-कई दिन गुजारे। आंदोलन को गति देने के लिए पहले राम ज्योति यात्रा निकाली। इस दौरान पुलिस ने उन्हें बरेली में गिरफ्तार कर लिया। 13 दिन जेल में काटे। इसके बाद दो दिन फतेहगढ़ जेल में रखा गया। जेल में अनशन करने के बाद छूटने पर वह वृंदावन से 26 बसों के साथ अयोध्या पहुंचे। रास्ते में मथुरा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और दो दिन नरहौली थाने में रखा। वहां से एटा जेल भेज दिया, जहां राम नाम के सहारे 29 दिन काटे। जेल में भी सुबह और शाम हनुमान चालीसा और राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए हवन हुए। जेलर की पत्नी भी राम भक्त थी। वह जेल में हवन के लिए सामग्री भेजा करती थीं। एक तरफ जेल में संत और रामभक्त हवन कर प्रभु राम के मंदिर की कामना कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ 6 दिसंबर 1992 में विवादित ढ़ाचा ढहाया जा रहा था।
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