गोकुल यानी भगवान श्रीकृष्ण का गांव। 11 वर्ष 52 दिन तक जहां रहकर ठाकुरजी ने बाललीलाएं कीं। राक्षसों का वध किया। ग्वालों के साथ रहकर गायें चराईं। आज वही गोकुल विकास के मामले में हाशिए पर है। रोजगार के लिए लोग पलायन कर रहे हैं। घरों पर ताले लगे हैं। गायों की संख्या बड़ी तेजी से कम हुई है। अगर यहां से किसी को शहर जाना हो तो सवारी के लिए भी एक किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
मथुरा से पूरब की दिशा में बामुश्किल आठ किलोमीटर दूर है गोकुल। पुरानी बसावट है लिहाजा तंग गलियां और छोटे-छोटे मकानों की बस्ती है। यहां आबादी 5000 के करीब है। भगवान कृष्ण की बाललीलाओं का केंद्र रही आस्था की इस बस्ती के तमाम लोग काम की तलाश में अपना गांव छोड़ रहे हैं। पैंसठ वर्षीय बाबूलाल पुजारी का कहना है कि उनके सामने ही सौ से ज्यादा परिवार बाहर चले गए।
नौकरी की तलाश में गए थे और वहीं बस गए। मकानों पर ताले लगे हैं। साल-छह महीने में ही आते हैं। कन्हैया लाल शर्मा का कहना है कि लोगों के लिए है ही क्या। एक सरकारी अस्पताल है जिसमें कोई जाता ही नहीं। डाक्टर ही नहीं बैठते। अगर मथुरा या दूसरे शहर जाना हो तो एक किलोमीटर पैदल चलकर बैराज पर जाना पड़ता है, तब सवारी मिलती है।
किशोर भाटिया के चाचा और परिवार के सभी लोग गोकुल से चले गए हैं। किशोर भाटिया ही यहां परिवार के साथ रह रहे हैं। राधा बल्लभ शर्मा कहते हैं कि कभी हर घर में गाय होती थी। लेकिन अब जिनके पास खेती की जमीन है केवल वही गाय पाल सकते हैं। साफ-सफाई के भी इंतजाम नहीं है। कस्बे में घुसते ही लोगों का सामना गंदगी से होता है।
पौराणिक घाटों पर गंदगी का अंबार
गांव में प्रवेश करते ही दाहिने हाथ पर पौराणिक घाट बने हुए हैं। जब बैराज नहीं बना था तब यमुना वहां तक बहती थी। इन घाट से बहुत पुरानी मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। लेकिन इनके सुंदरीकरण पर किसी का ध्यान ही नहीं जा रहा है। यहां जगह-जगह गंदगी है। क्योंकि बाहर से कृष्ण भक्त जिन वाहनों से आते हैं उनकी पार्किंग की भी जगह यही है लिहाजा यहां का विकास कराया जाना चाहिए था। लेकिन इस तरफ किसी ने सोचा ही नहीं है।
नंदभवन को जाने वाले रास्तों का सुंदरीकरण नहीं
नंदभवन तक जाने वाले रास्तों का भी सुंदरीकरण नहीं किया गया है। यहां कोई ऐसा पहचान बोर्ड तक नहीं है जिससे लोगों को पता चल सके नंदभवन तक कैसे और कहां होकर जाना है। पर्यटन विभाग ने भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया है।
पर्यटक आवास गृह की हालत भी खराब
यहां पर्यटन विभाग ने पर्यटक आवास गृह बना रखा है लेकिन वहां के हालात देखकर ऐसा लगता है कि वर्षों से कोई गया ही नहीं है। जगह-जगह गंदगी पड़ी है। चारों तरफ लंबी-लंबी झाड़ियां उग गई हैं। मानो वर्षों से सफाई ही नहीं हुई हो। यहां आवास गृह के भीतर जाने की बात तो छोड़ दीजिए बाहर भी नहीं खड़े हो सकते।