फरह (मथुरा)। बानी, सूरज, फूलकली और वीर। यह इंसानों के नहीं बल्कि बेजुबान हाथी और हथिनी के नाम हैं। इनमें से कोई सर्कस में करतब दिखा रहा था तो कोई मंदिर के आगे भीख मांगने पर मजबूर था। रेस्क्यू के बाद इन्हें वाइल्डलाइफ एसओएस लाया गया। यहां उचित देखभाल और खानपान के चलते ये अब स्वस्थ जिंदगी बिता रहे हैं। घाव भरने के बाद ये हाथी स्वस्थ होकर चिंघाड़ने के साथ आपस में मस्ती कर रहे हैं।
वाइल्डलाइफ एसओएस में लाए गए हर हाथी की अपनी एक अलग कहानी है। वर्तमान में यहां 34 हाथी मौजूद हैं। संस्था सरकारी, गैर सरकारी विभागों के साथ सामंजस्य बनाकर हाथियों के जीवन को सुधारने की दिशा में कार्य कर रही है। देश विदेश के कई सेलिब्रिटी यहां भ्रमण कर हाथियों के जीवन को निकट से जान चुके हैं। इनमें बॉलीवुड से सिद्धार्थ मल्होत्रा, अस्मित पटेल, दिशा पाटनी जैसे कलाकार शामिल हैं। वहीं कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भी यहां आ चुके हैं।
बानी:-वर्ष 2024 में अपनी मां के साथ टहल रही हथिनी बानी को एक ट्रेन से टक्कर मार दी। इससे उसकी मां की मौत हो गई और बानी के पीछे के पैर चोटिल हो गए। उत्तराखंड वन विभाग की मदद से बानी को फरह लाया गया। यहां उचित देखभाल के बाद बानी स्वस्थ जीवन जी रही है।
सूरज:-वर्ष 2015 में महाराष्ट्र के एक मंदिर से रेस्क्यू किया गया हाथी सूरज वाइल्डलाइफ सेंटर में स्वस्थ है। मंदिर में उसे चेन से बांध कर रखा जाता था। सूरज अपने पैर भी नहीं मोड़ पाता था। हालत से थे कि उसका एक पैर सड़ गया था। उचित देखभाल के कारण वह यहां स्वस्थ्य व खुश है।
फूलकली:-हथिनी फूलकली को 2012 में आगरा से लाया गया था। वह घूम-घूम कर भीख मांगने का कार्य करने करती थी। फूलकली यहां सबसे अधिक उम्र की हथिनी है और एक आंख से देख नहीं सकती। यहां उसकी दोस्त माया और हेमा हैं, जिनके साथ वह मस्ती से अपना समय बिता रही है।
मिया:- वर्ष 2015 में चेन्नई में सर्कस से बचाकर लाई गई हथिनी मिया को जब यहां लाया गया तब वह बहुत कमजोर हो चुकी थी। उसके पैर में बड़े-बड़े घाव थे, नाखून टूटे हुए थे। यहां विशेषज्ञों की टीम की देखभाल ने उसके जीवन को नई ऊर्जा दी है। वह अपनी दोस्त रिया के साथ मडबाथ लेती है।
वीर:- उत्तर प्रदेश के मऊ से लाया गया हाथी वीर धार्मिक गतिविधियों में अपनी सेवा देता था। उसे इसी साल फरह स्थित सेंटर पर लाया गया है। एक दुर्घटना में पैर टूटने के बाद वह लंगड़ेपन का शिकार है। टीम की देखभाल ने उसे काफी हद तक ठीक कर दिया है। वह यहां स्वस्थ है।
अच्छी देखभाल हमारी जिम्मेदारी हमारी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है, कि रेस्क्यू किए गए हर हाथी को जिंदगी भर अच्छी देखभाल मिले। -कार्तिक सत्यनारायण, सह संस्थापक, वाइल्डलाइफ एसओएस