फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mathura News: जलेस की विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने मानवीय संवेदनाओं में गिरावट पर जताई चिंता

विज्ञापन
विज्ञापन
मथुरा। मौजूदा दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ही संस्कृति और साहित्य की चुनौती है। अस्तित्व के लिए संघर्ष की वजह से आज नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है। बाजार हमारे साहित्यिक और सांस्कृतिक मूल्यों की दशा व दिशा तय कर रहा है, इसी कारण मानवीय संवेदनाओं में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है।
विज्ञापन

यह विचार जनवादी लेखक संघ के बैनर तले महाविद्या कॉलोनी में आयोजित ‘वर्तमान समय की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चुनौतियां’ विषय पर विचार गोष्ठी में दक्षिण बिहार गया विश्वद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. सुरेश चंद ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में रचनाकारों को दकियानूसी अवधारणाओं से बाहर निकल कर प्रगतिशील विचारों की रचनात्मक अभिव्यक्ति करनी होगी। सामाजिक परिवर्तन के लिए आगे बढ़ कर जन सामान्य को साहित्यिक व सांस्कृतिक चुनौतियों से अवगत कराना होगा।
विशिष्ट वक्ता अलीगढ़ से उप आबकारी आयुक्त रघुवीर सिंह ‘अरविंद’ ने कहा कि संस्कृति का संबंध मातृभाषा से है, जब भाषा की उपेक्षा होगी तो साहित्य और संस्कृति की उपेक्षा स्वाभाविक है। आज के समय की बड़ी चिंता मोबाइल है जो लिखने-पढ़ने की आदत को खा रहा है।
विज्ञापन

गोष्ठी में डॉ. अशोक बंसल, कवि अटलराम चतुर्वेदी, पवन सत्यार्थी, प्रियंका खंडेलवाल, जगवीर सिंह एडवोकेट आदि ने विचार रखे। जन सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष मुरारीलाल अग्रवाल, नीतू गोस्वामी, राहुल गुप्ता, देवेंद्र गुलशन, विवेक दत्त मथुरिया, मनीष भार्गव, उपेंद्रनाथ चतुर्वेदी, विजयपाल सिंह नागर आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता महेंद्र नेह, संचालन सचिव डॉ. धर्मराज ने और धन्यवाद जलेस के अध्यक्ष टीकेंद्र शाद ने व्यक्त किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें