ग्रेटर नोएडा-दिल्ली के बीच छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों वाली स्लीपर बस की जांच का कनेक्शन मथुरा से सामने आया है। बस के मई से जुलाई के बीच 12 चालान हुए, इनमें नौ मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर ओवरस्पीडिंग के हैं।
ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के बीच जिस स्लीपर बस में छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म हुआ था, उसकी जांच अब मथुरा तक पहुंच गई है। जांच में बस चालक के नियमों की अनदेखी का सिलसिला भी सामने आया है। अप्रैल में खरीदी गई इस बस के मई से जुलाई तक 12 चालान किए गए, जिसमें सर्वाधिक नौ चालन मथुरा क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेस-वे पर ओवरस्पीडिंग में हुए। पुलिस अब चालक-परिचालक की गतिविधियों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है।
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अधिकारियों के अनुसार, बस (यूपी 83 ईटी 3789) इसी वर्ष 28 अप्रैल में फिरोजाबाद में पंजीकृत हुई थी। पहला चालान 11 मई 2026 को हमीरपुर के कुरारा में अवैध पार्किंग के लिए 500 रुपये का हुआ। इसके अगले दिन 12 मई को मथुरा में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के जरिए ओवरस्पीडिंग का चार हजार रुपये का चालान किया गया। इसके बाद 23 जून को मथुरा में ही यमुना एक्सप्रेसवे पर सवारियां बैठाने के आरोप में 500 रुपये का चालान हुआ। नियम तोड़ने का सिलसिला यहीं नहीं थमा। एक से छह जुलाई तक लगातार छह दिन यमुना एक्सप्रेसवे पर ओवरस्पीडिंग के चालान काटे गए। प्रत्येक चालान चार हजार रुपये का था। इस तरह छह दिनों में 24 हजार रुपये का जुर्माना हुआ।
जांच में सामने आया है कि आठ जुलाई को हमीरपुर में परमिट नहीं होने, रिफ्लेक्टर टेप नहीं होने समेत अन्य कमियों पर एआरटीओ ने 26 हजार रुपये का चालान किया। इसके बाद भी बस की रफ्तार पर लगाम नहीं लगी। 11 और 23 जुलाई को मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर ओवरस्पीडिंग के लिए चार-चार हजार रुपये के दो और चालान किए गए। इसी तरह मई से जुलाई के बीच दो माह में बस पर 12 बार कार्रवाई हुई और कुल 63 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
यह था मामला
इसी स्लीपर बस में ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के बीच एक छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप है। चार अगस्त की रात पीड़िता दिल्ली के कश्मीरी गेट थाने पहुंची थी। पुलिस ने मामले में कानपुर देहात निवासी चालक कुलदीप और घाटमपुर निवासी संदीप को गिरफ्तार किया है। बस भी बरामद कर ली गई है।
सुरक्षित हैं सीसीटीवी फुटेज
एसपी देहात सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि एक्सप्रेसवे पर कैमरे लगे हुए हैं, जिनकी छह महीने तक की फुटेज और एक साल का डाटा सुरक्षित रहता है। इस मामले में मथुरा पुलिस जांच में पूरा सहयोग करेगी। आरोपियों ने बस कहां रोकी और किससे मिले, इसका भी इनपुट संबंधित पुलिस को मांगने पर सौंपा जाएगा।