माता-पिता की डांट कई बार बच्चों को इतना उत्तेजित कर देती है कि वे बिना सोचे-समझे घर छोड़कर निकल जाते हैं। आगरा में पिछले एक वर्ष में ऐसे 89 बच्चों को रेलवे चाइल्ड लाइन ने रेलवे स्टेशनों से रेस्क्यू किया। इनमें 7 से 15 वर्ष तक के बच्चे थे। काउंसलिंग में सामने आया कि अधिकांश बच्चे मोबाइल पर वीडियो देखने से रोकने या पढ़ाई के लिए माता-पिता की डांट से नाराज होकर घर से निकले थे।
रेलवे स्टेशनों पर अकेले घूमते या संदिग्ध स्थिति में दिखाई देने वाले बच्चों पर चाइल्ड लाइन और रेलवे पुलिस की नजर रहती है। रेलवे पुलिस के सीओ राजेश दीक्षित ने बताया कि अकेला बच्चा दिखाई देने पर उससे बातचीत कर उसके घर से निकलने का कारण जानने का प्रयास किया जाता है। काउंसलिंग के बाद बच्चे को सुरक्षित उसके परिजन के सुपुर्द किया जाता है। हाल ही में सिगरेट के साथ पकड़े जाने पर डांट से नाराज होकर एक राष्ट्रीय स्तर के टेबल टेनिस खिलाड़ी ने भी हॉस्टल और घर छोड़ दिया था। मुंबई में वह मजदूरी कर दिन गुजार रहा था।
सहनशीलता और धैर्य की कमी बन रहे वजह
एसएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल सिन्हा ने बताया कि बच्चों में सहनशीलता और धैर्य की कमी है। इसके लिए वर्तमान पेरेंटिंग भी एक वजह है। अभिभावक बच्चों की हर मांग को झट से पूरा कर रहे हैं। इससे उनमें ना सुनने और इंतजार की प्रवृत्ति विकसित नहीं हो रही है। अति होने पर अभिभावक बच्चों को डांट देते हैं तो वे इसके आदी नहीं है। इसके चलते वह आत्मघाती कदम उठाने के अलावा घर छोड़कर चले जाते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
- बच्चों की जरूरत पूरी करनी है, मांग नहीं।
- बच्चों को सामाजिक बुराई के प्रति आगाह करें।
- उनके मित्र, व्यवहार और क्रियाकलापों के बारे में मित्रवत होकर जानें।
- बच्चे के व्यवहार में बदलाव आने पर विशेषज्ञ से काउंसिलिंग कराएं।
- मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के टोल फ्री नंबर टेलीमानस 14416 पर फोन करें।