मथुरा। हौसला ऐसा रखा कि आसमां भी जमीं छूने लगा। कैंसर की एडवांस स्टेज को हराकर जिंदगी की जंग जीतने वाली मथुरा महोली रोड निवासी डॉ.शालिनी अग्रवाल अब कैंसर रोगियों के लिए वरदान साबित हो रहीं हैं। एम्स और मेदांता जैसे देश के बड़े कैंसर हॉस्पिटल में आने वाले कैंसर मरीजों के लिए काउंसलर का काम कर रहीं हैं।
डॉ. शालिनी अग्रवाल को वर्ष २०१४ में उस समय ब्रेस्ट कैंसर हुआ था, जब उनके बच्चा हुआ। ब्रेस्ट कैंसर होने के कारण बच्चा एबनार्मल हुआ और खुद की जिंदगी कैंसर के दांव पर लग गई। उन्होंने चिकित्सकों के दरवाजे खटखटाने के बाद एम्स में जाकर अपना इलाज शुरू कराया। वहां पर दो दफा कैंसर पूरी तरह खत्म होने के बाद फिर से हावी हो गया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा से उपचार शुरू करवाया। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
इसके बाद उन्होंने कैंसर रोगियों के लिए काम करने का मन बना लिया और वह रोगियों के लिए प्रेरणाश्रोत बन गईं। एम्स के चिकित्सकों ने उनकी इच्छा शक्ति देखकर उन्हें काउंसलर चुन लिया। इसके बाद वह मेदांता सहित अन्य कैंसर हॉस्पिटल से भी जुड़ गईं और अब तक २०० से अधिक मरीजों को कैंसर के गर्त से उबार चुकी हैं।
इंडियन कैंसर सोसाइटी दिल्ली ने उन्हें मथुरा वृंदावन के लिए अपना ब्रांड एंबेसडर चुना है। वह फिलहाल मथुरा में वृद्धाश्रम तथा अन्य स्थानों पर मौजूद कैंसर मरीजों को कैंसर को हराने के लिए प्रेरणा दे रही हैं। उन्होंने बताया कि अब उन्हें कैंसर नहीं है। चिकित्सकों ने दवा लेने से भी मना कर दिया है।