यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद वहां फंसे जिले के कई विद्यार्थी धीरे-धीर लौट रहे हैं। उनमें से एक छात्रा गुंजिता शनिवार को सुबह भारत लौट आईं। परिवार के सदस्य उसे दिल्ली से मथुरा लाए। पिछले करीब एक सप्ताह से परिवार बेटी को लेकर चिंतित रहा। जैसे ही बेटी भारत लौटी तो परिवार में खुशी वापस आ गई। छात्रा ने कहा कि मैं हारी नहीं हूं, युद्ध बंद होने के बाद वापस पढ़ाई करने जाऊंगी।
श्रीजी शिवाशा एस्टेट निवासी गुंजिता सिंह राजपूत ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि वह हंगरी से फ्लाइट से शनिवार सुबह भारत लौट आईं। एमबीबीएस तीसरी वर्ष की छात्रों ने बताया कि यूक्रेन में रहते हुए उसने हिम्मत नहीं हारी। पिता विजय सिंह राजपूत व माता ममता सिंह से जब भी बात होती थी तो यही कहा कि हिम्मत मत हारो। आपकी बेटी कमजोर नहीं है। मैं सकुशल वापस लौटूंगी। यूक्रेन से हंगरी के बीच ट्रेन द्वारा 1,300 किलोमीटर का सफर बड़ा डरावना रहा।
छात्रा ने बताया कि शनिवार को जब परिजन दिल्ली एयरपोर्ट पर लेने पहुंचे तो मां भावुक हो गईं और गले मिलकर रोने लगीं। घर आने पर मां ने घी के दीपक से आरती उतारी और हल्दी-चावल का तिलक भी लगाया। कहा कि जीवन में किसी के साथ भी इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं। गुंजिता सिंह ने कहा कि जब भारत से अकेले यूक्रेन में पढ़ाई करने गई थी, तभी सोच लिया था कि हर कठिनाई का सामना स्वयं करूंगी। सामान्य स्थिति होते ही फिर वापस एमबीबीएस पूरा करने जाऊंगी।
यूक्रेन के दहशत भरे माहौल के बीच वहां फंसी आर्यनगर निवासी करन सिंह एडवोकेट की पुत्री याशिका सिंह रविवार की शाम को कोसी पहुंचेगी। करन सिंह एडवोकेट ने बताया कि याशिका साथियों के साथ यूक्रेन से तो सकुशल निकल आई है। शुक्रवार को रोमानिया के बुखारेस्ट के शेल्टर होम में रहकर फ्लाइट मिलने का इंतजार कर रही है। यशिका के रविवार शाम तीन बजे तक कोसी पहुंचने की उम्मीद है।