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Mathura News: नाम का शिक्षा का अधिकार, धरातल पर सब बेकार

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मथुरा। केवल नाम के लिए शिक्षा का अधिकार है। धरातल पर कुछ नजर नहीं आ रहा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने की व्यवस्था है, लेकिन पात्र पाए जाने के बाद भी 50 फीसदी से ज्यादा बच्चों को अब तक प्रवेश न देकर योजना का मजाक बनाया जा रहा है।
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योजना के तहत पहले, दूसरे और तीसरे चरण में लाॅटरी के माध्यम से 1043 बच्चों का प्रवेश लेना सुनिश्चित हुआ, लेकिन इसमें भी लगभग 50 प्रतिशत बच्चों का स्कूल में प्रवेश नहीं लिया जा रहा। अभिभावक हर दिन स्कूल और बीएसए कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। इधर, प्रवेश लेने में आनाकानी करने वाले स्कूल संचालकों को बीएसए सुनील दत्त ने नोटिस भेजा है।

आरटीई के तहत अपने बच्चों को स्कूलों में प्रवेश कराने वाले अभिभावक वह हैं जो या तो रिक्शा चलाते हैं या कहीं मजदूरी करते हैं, लेकिन कागजों में शासन की ओर से लाभ पाने के लिए पात्र होने के बाद भी स्कूल प्रबंधन की मनमानी से उनके बच्चों को प्रवेश नहीं मिल रहा है। हैरानी की बात यह है कि विभागीय अधिकारी भी सिर्फ नोटिस भेजकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। बीएसए का कहना है कि पात्र बच्चों को प्रवेश न देने वाले स्कूलों पर मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी।
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आंकड़े एक नजर में

प्रथम चरण

1105 आवेदन आए, 579 स्वीकृत, 526 अस्वीकृत हुए, 455 बच्चों को स्कूल आवंटित हुए, जबकि 134 बच्चों का लॉटरी में नंबर नहीं आ सका।



दूसरा चरण

1039 आवेदन आए, 539 स्वीकृत हुए, 500 अस्वीकृत हो गए, 399 बच्चों को स्कूल आवंटित हुए, जबकि 140 बच्चों का लॉटरी में नंबर नहीं आ सका।



तीसरा चरण

571 आवेदन आए, 228 स्वीकृत हुए, 343 अस्वीकृत हुए, 199 बच्चों को स्कूल आवंटित हुए, जबकि 29 बच्चों का लॉटरी में नंबर नहीं आ सका।
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