उत्तर प्रदेश की सियासत में फिर से काबिज होने को दम भर रही सपा अपने सभी विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करा रही है। विधायक का पीआर और पब्लिक के बीच उनकी छवि की जांच कराई जा रही है। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की ‘इंटेलीजेंस’ इसमें जुट गई है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट अक्तूबर में पार्टी के पास पहुंच जाएगी, उसके बाद ही टिकटों पर फैसला फैसला होगा।
मिशन 2017 को लेकर कई दफा अपनी चिंता व्यक्त कर चुके सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अपने एक-एक विधायक और मंत्री का पब्लिक रिलेशन चेक कराना शुरू कर दिया है। इसके लिए सपा के खामोश सिपहसलार लगाए गए हैं। संगठन के पुराने लोगों का भी सहयोग लिया जा रहा है। कुछ जगहों पर सपा मुखिया के करीबी समझे जाने वाले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से भी रिपोर्ट ली जा रही है।
मुलायम कई दफा नेताओं पर लगा चुके आरोप
8 जुलाई 2016: सपा के कुछ नेता कर रहे कब्जे लूट-खसोट व दबंगई।
11 जुलाई 2016: सपा में चापलूसों की फौज।
28 जून 2016: हमने पतंगों को जरा ढील क्या दे दी खुद को फलक का खुदा समझ बैठे।
26 फरवरी 2016: मंत्री आजकल बहुत ज्यादा कार्यक्रमों में जा रहे हैं उन्हें पब्लिक के बीच जाना चाहिए।
24 जनवरी 2016: प्रदेश के आधे मंत्री पैसा कमाने में लगे हैं।
3 मार्च 2014: यूपी सरकार चापलूसों से घिरी है और मुख्यमंत्री को उनसे दूर रहना चाहिए।
हर जिले से मांगा मासिक बैठक का हाजिरी रजिस्टर
सपा मुखिया ने हर जिले से मासिक बैठक का रजिस्टर मांगा है। रजिस्टर में यह देखा जाएगा कि हर मीटिंग में बड़े नेता और विधायक पहुंचे हैं या नहीं। सपा मुखिया ने विधायकों को निर्देश दिए थे कि जिला और महानगर इकाई की जो भी मासिक बैठक होगी उसमें पहुंचना विधायकों के लिए अनिवार्य है। कई जिलों से शिकायत पहुंची है कि मीटिंगों में विधायक आते ही नहीं हैं।